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इस शहर में हर मोड़ पर असुरक्षित हैं महिलाएं

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दिसंबर 2012 में हुए निर्भया कांड के बाद दिल्ली में बलात्कार, छेड़खानी और महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों में लगातार तेजी आ रही है। यह बात खुद दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाईकोर्ट को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कही है।
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आंकड़े भी यही सच्चाई बयां करते हैं। थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन के मुताबिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट में महिलाओं की सुरक्षा के मामले में दिल्ली दुनिया का चौथा सबसे खराब शहर है। यानि दिल्ली में महिलाओं के लिए सार्वजनिक परिवहन में यात्रा करना बेहद खतरनाक है।

इस सूची में कोलंबिया की राजधानी बोगोटा, मैक्सिन सिटी और पेरू का शहर लीमा दुनिया के शीर्ष शहर हैं जहां महिलाएं पब्लिक ट्रांसपोर्ट में यात्रा करते समय सबसे असुरक्षित महसूस करती हैं। इनके बाद दिल्ली चौथा ऐसा शहर है जहां अंधेरा होने के बाद महिलाओं के लिए सार्वजनिक परिवहन में यात्रा करना असुरक्षित है।
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(सभी फोटो: निर्भया केस के बाद जागरूकता फैलाने के लिए हुआ फोटोशूट)

थाने में बनाएं सकारात्मक माहौल

महिलाओं की सुरक्षा की एक जनहित याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए दिल्ली पुलिस को हिदायत दी कि वह थानों में ऐसा माहौल बनाएं जिससे कि रेप पीड़िता को वहां जाने में कोई परेशानी महसूस न हो।

कोर्ट ने दिल्ली के महिला एवं बाल विकास विभाग को भी निर्देश दिया कि वह बलात्कार और छेड़छाड़ को एक सामाजिक समस्या के तौर पर समाज में प्रचारित करने का काम करे।

गौरतलब है कि सामाजिक कार्यकर्ता नंदिता धर ने महिला सुरक्षा पर जनहित याचिका ‌दाखिल कर रखी है। बुधवार को इस मामले पर सुनवाई के दौरान दिल्ली स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी (DSLSA) ने कहा कि रेप क्राइसिस सेंटर तक पीड़ित महिलाओं की पहुंच को आसान बनाए जाने की जरूरत है।
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जांच में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल हो

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस बदर दुरेज अहमद और जस्टिस सिद्घार्थ मृदुल की बेंच ने कहा कि रेप के सभी मामलों में साइंटिफिक मेथेड अपनाया जाना चाहिए। साथ ही जांच कर रही टीम को डीएन और फिंगर प्रिंटिंग जैसी तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए।

गौरतलब है कि इससे पहले इसी मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ऐसे 44 रेड फ्लैग्ड एरिया की सूची सौंप चुकी है जहां महिलाओं के खिलाफ सबसे ज्यादा ‌अपराध होते हैं।

हालांकि इस मामले में पुलिस का कहना है कि ‌16 दिसंबर 2012 को निर्भया केस के बाद से दिल्ली में गैंगरेप और ऐसे ही मामलों में वृद्घि हुई है लेकिन इनमें से ज्यादातर अपराध में लड़की के जानने वाले शामिल रहे हैं। इन घटनाओं को घर के अंदर अंजाम दिया जाता है। ऐसे में पुलिस के लिए इन मामलों पर रोक लगाना मुश्किल होता है।

कोर्ट ने डीएसएलएसएलए को भी निर्देश दिया कि वह रेप क्राइसिस सेंटर के लिए तीन या चार अंकों वाला हेल्पलाइन नंबर मुहैया कराए जिससे कि उसे आसानी से याद किया जा सके और डायल किया जा सके।

साभार: indianexpress.com
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