इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के ज्वाइंट सेक्रेटरी डॉक्टर एसके पोद्दार ने कहा कि भारत का समाज ऐसा है कि बिना कड़े नियमों के सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियमों का पालन करवा पाना बेहद मुश्किल काम है।
लेकिन सरकार अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बाजारों को खोलने जैसे कदम उठा रही है। उनकी राय है कि बाजार खोलने के पहले सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों को पूरी तरह पालन कराना अनिवार्य किया जाना चाहिए। इसके बिना बाजारों को खोलना आत्मघाती साबित हो सकता है।
दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि अगर राजधानी में रोज 1000 मामले सामने आते हैं, तो भी वे स्थिति का मुकाबला करने में सक्षम होंगे।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक अगर कोरोना के कुल एक हजार मामले सामने आते हैं, तो इसमें लगभग 80 फीसदी मामले हल्के लक्षणों वाले या बिल्कुल लक्षणविहीन वाले होते हैं।
इन केसों में लोगों को भर्ती करने की जरुरत नहीं होती है। इन लोगों को उनके घरों में ही रखकर या क्वारंटीन सेंटर्स में रखकर इलाज किया जा सकता है।
जबकि बाकी 200 मामलों में भी बहुत कम मरीजों को आईसीयू और बेहद कम लोगों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है। इतने मामलों की देखभाल के लिए सरकार के पास पर्याप्त सुविधाएं हैं।
लेकिन अगर कोरोना मामलों की संख्या इससे ज्यादा बढ़ती है तो हालात बिगड़ सकते हैं।
दिल्ली के 13 विभिन्न कोविड केयर सेंटरों में 832 लोगों का इलाज चल रहा है। इसके अलावा डेडीकेटेड कोविड हेल्थ सेंटरों में 181 लोग भर्ती हैं। सभी डेडीकेटेड कोविड हॉस्पीटलों में कुल मिलाकर 1096 लोगों का इलाज चल रहा है। इसमें एलएनजेपी में 371, एम्स झज्जर में 231, अपोलो में 76, मैक्स में 94 और सर गंगाराम में 31 मरीज शामिल हैं।
राजधानी के लिए यह खबर संतोष देने वाली है कि यहां कुल मरीजों में केवल 75 को आईसीयू में रखा गया है, जबकि केवल 11 को ही वेंटीलेटर की आवश्यकता पड़ी है। अभी तक कोरोना के कुल मिलाकर 64108 टेस्ट किए जा चुके हैं।
कोरोना के मामलों की पुष्टि आरटी- पीसीआर टेस्ट (RT- PCR Test) के जरिए की जाती है। दिल्ली में अब तक कुल 24 प्रयोगशालाओं को यह टेस्ट करने की अनुमति दी गई है। इनमें 11 लैब सरकारी और 13 लैब प्राइवेट संस्थाओं के हैं। इनकी पूरी लिस्ट इस प्रकार है-
राजधानी दिल्ली स्वास्थ्य क्षमता के मामले में देश के दूसरे राज्यों से बेहतर समझी जाती है। केंद्र सरकार की कोविड वॉरियर्स वेबसाइट के मुताबिक राजधानी दिल्ली में 17,996 एमबीबीएस डॉक्टर हैं, जिन्होंने राजधानी की स्वासथ्य सुविधाओं को संभाल रखा है।
उनके अलावा 2530 एमबीबीएस छात्र और 43865 नर्सें दिन-रात लोगों की सेवा कर रही हैं। दिल्ली में 12011 दंतचिकित्सक, 27302 फार्मासिस्ट, 350 लैब सहायक और 11213 आयुष विशेषज्ञ लोगों की स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने का काम कर रहे हैं।
5817 आशा कार्यकर्ता, 20518 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी लोगों की सेवा में जुटे हैं। अगर अस्पतालों की बात करें तो दिल्ली में चार ईएसआईसी के अस्पताल, एक सीपीएसई का अस्पताल, एक रेलवे का अस्पताल कोरोना काल में लोगों की सेवा कर रहे हैं।
इसके आलावा 83 वेटरनरी डॉक्टर, 4478 ट्रेंड हेल्थ प्रोफेशनल्स, 266 एलाइड हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स, 6100 एनएसएस के सदस्य, 1173 एनसीसी सदस्यों और 5809 रिटायर्ड लोगों ने भी कोरोना काल में स्वयं को कोविड वारियर्स के रुप में सेवा करने के लिए रजिस्टर कराया है।
इसके अलावा 812 लोग इसी दौरान दिल्ली की सामाजिक और मनोवैज्ञानिक समस्याओं को सुलझाने के लिए मदद कर रहे हैं। इसी काल में 2076 पोस्टमैन भी लोगों की सेवा में जुटे हुए हैं। वे लोगों तक पैसा पहुंचाने और आवश्यक दस्तावेजों को पहुंचाने में दिन-रात सेवा में जुटे हैं।