तालाब हमारे पर्यावरण का अहम हिस्सा होते हैं। इनके जरिए जमीन के नीचे गए पानी से भूजल स्तर बना रहता है तो साथ ही इसके आसपास जैवीय विविधतता भी विकसित होती है। लेकिन गर्मी में बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने वाली दिल्ली अपने तालाबों के रखरखाव के प्रति बिलकुल उदासीन है।
पूर्वी दिल्ली के विनोद नगर इलाके में पहले एक तालाब हुआ करता था। अब डीडीए ने यहां पर पार्क विकसित कर दिया है। बताया गया है कि राजीव गांधी अस्पताल को बनाने के लिए भी इसके पास के एक बड़े तालाब की जमीन को इस्तेमाल कर लिया गया है। इसी प्रकार धौलापुरा के एक जलाशय की जमीन पर फैसिलिटी सेंटर बना दिया गया है।
इसी प्रकार दक्षिण के पॉश इलाके मुनिरका के पास एक जलाशय पर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स विकसित कर दिया गया है तो महिपालपुर का तालाब भी नक्शे से गायब हो चुका है। इसी तरह नॉर्थ जोन के गोपालपुर के जलाशय की जमीन पर बायोडायवर्सिटी पार्क विकसित कर दिया गया है।
दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 1140 एमजीडी पानी की जरूरत होती है। दिल्ली जल बोर्ड का दावा है कि वह लगभग 900 एमजीडी पानी की आपूर्ति करता है। इस प्रकार रोजाना लगभग 250 एमजीडी पानी की कमी होती है।
यह कमी पानी टैंकर माफियाओं द्वारा पूरी कराई जाती है। इसकी कीमत आनंद पर्वत, करोल बाग, तिमारपुर, इंद्रपुरी जैसे इलाकों के गरीब लोगों को भारी रकम देकर चुकानी पड़ती है।