दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल अपने प्रधान सचिव के दफ्तर पर छापेमारी के बाद से ही लगातार कह रहे हैं कि छापे के पीछे सीबीआई की मंशा डीडीसीए में अनियमितताओं के मामले की जांच से जुड़े दस्तावेज जब्त करने की रही है।
क्रिकेट संघ में वित्तीय अनियमितताओं के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली दिसम्बर 1999 से 2013 तक डीडीसीए कते अध्यक्ष रहे हैं।
गौरतलब है कि 12 नवंबर को भारत और दक्षिण अफ्रीका टेस्ट मैच की मेजबानी से पहले दिल्ली सरकार ने डीडीसीए घोटाले की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय चांज कमेटी का गठन किया था। जांच कमेटी में पीडब्लयूडी के प्रमुख सचिव चेतन बी सांघी, खेल सचिव पुन्य सलिल श्रीवास्तव और दिल्ली सरकार के वरिष्ठ वकील राहुल मेहरा शामिल थे।
इस कमेटी ने अपनी दो दिन की जांच में तीन रिपोर्टों के निष्कर्षों का ब्यौरा प्रस्तुत किया। इसमें कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के गंभीर धोखाधड़ी और जांच कार्यालय (SFIO) द्वारा की गई जांच, डीडीसीए के आंतरिक पैनल द्वारा की गई जांच और डीडीसीए पर दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा गठित कमेटी की रिपोर्ट शामिल थी।
तीन रिपोर्ट जो खड़े करती हैं सवाल
क्या कहती है SFIO रिपोर्ट- इसके अनुसार 20 से ज्यादा अनियमितताएं सामने आई। जिनमें वित्तिय वर्ष 2008-09 से 2011-12 तक वित्तिय अनियमितताएं भी शामिल हैं। इस दौरान अरुण जेटली डीडीसीए के अध्यक्ष थे।
प्रमुख बिंदु-
1- डीडीसीए की आंतरिक नियंत्रण प्रणाली कमजोर है। इसकी अचल संपत्ति का ब्यौरा रिकॉर्ड में नहीं रखा गया है।
2- 20 हजार रुपए से ज्यादा के लागत के खर्चों में लेन-देने नकद किया गया है- इसमें संचालकों और सदस्यों को निदेशक मंडल या केंद्र सरकार की अनुमति के बिना भुगतान किया गया है।
3- फिरोजशाह कोटला को दोबारा बनाने में 2002 से 2007 तक 5 साल का समय लिया गया। इसके लिए शुरूआती बजट 24 करोड़ था लेकिन इसमे कुल खर्च 114 करोड़ किया गया।
4- स्टेडियम के पुर्ननिर्माण में जारी किए गए अनुबंधों का कोई पेपर रिकॉर्ड नही रखा गया।
5- एमसीडी और दिल्ली शहरी कला आयोग से बिना अनुमति के अवैध निर्माण किया गया।
6- डीडीसीए ने बिना उचित प्रक्रिया और अनुमति के कॉर्पोरेट बॉक्स का निर्माण करवाया।
SFIO रिपोर्ट के मुताबिक जांच में यह भी सामने आया कि निरिक्षण के दौरान अरुण जेटली डीडीसीए के अध्यक्ष थे और गैर कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर कार्यकारिणी की बैठकों में निदेशक पैनल की अध्यक्षता करते रहे।
आंतरिक पैनल की रिपोर्ट में भी उजागर हुई खामियां
क्या कहती है डीडीसीए के पैनल की आंतरिक रिपोर्ट-
1- भारी वित्तीय अनियमितताओं के सबूत मिले।
2-2013 से 2014 के बीच कुछ फर्मों को संदेहास्पद और अवैध भुगतान किया गया।
3-संघ में जरूरत से ज्यादा स्टाफ- जरूरत से ज्यादा कर्मचारियों पर बडी धनराशि अनावश्यक तौर पर खर्च की गई।
4- ओवर टाईम के तौर पर भी जरूरत से ज्यादा और अनुचित पैसा खर्च हुआ।
5-रिकॉर्ड के मुताबिक 9 फर्मों को भुगतान किया गया, जिनके ई-मेल और निदेशक एक ही थे।
6-फर्जी बिल जारी किए गए, जिनमें भुगतान का कारण भी संदेहास्पद मिला।
7-उन कंपनियों को भुगतान किया गया, जिनका किसी भी तरह के प्रोजेक्ट या काम में कोई योगदान नहीं रहा।
क्या कहती है हाईकोर्ट द्वारा गठित पैनल की रिपोर्ट-
1-डीडीसीए के कामकाज में पारदर्शिता की भारी कमी पाई गई।
2-सदस्यों द्वारा डीडीसीए के बैनर तले अवैध रुप से निजी क्रिकेट एकेडमियों को चलाया गया।
3-डीडीसीए मैचों में छात्रों और खिलाड़ियों के लिए किसी भी तरह के अभ्यास का कोई भविष्य नजर नही आया।
अरुण जेटली का नाम मामले में आने से केंद्र सरकार पर भी हमले तेज हो रहे हैं। कांग्रेस और आप पहले ही वित्त मंत्री का इस्तीफा भी मांग चुके हैं। हालांकि सरकार ने इससे साफ इनकार कर दिया है।