हाईकोर्ट ने रेप व अन्य अपराधों से पीड़ित महिलाओं को मुआवजा प्रदान करने के लिए अभी तक पीड़ित महिला कोष न बनाने पर सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई है।
अदालत ने सरकार को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्या कोष बना दिया गया है, या नहीं। यदि नहीं बनाया गया तो ऐसा क्यों। न्यायमूर्ति बीडी अहमद व संजीव सचदेव की खंडपीठ ने सरकार को मामले में 10 दिन के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
खंडपीठ ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य व महिला एवं बाल विकास विभाग को भी नोटिस जारी कर स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि पीड़िता के लिए वन स्टॉप सेंटर (जहां उपचार, कानूनी सलाह, मुआवजा आदि सुभी सुविधाएं) को कैसे चलाया जाएगा।