चुनाव आयोग पर हमला करते हुए सौरभ भारद्वाज ने कहा कि आयोग ने आज तक आप विधायकों को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया। सीधे तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त पर तीखा हमला बोलते हुए भारद्वाज ने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को गिरवी रखकर एके जोती प्रधानमंत्री का कर्ज चुका रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इस मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त समेत तीन आयुक्तों ने सुनवाई की थी, लेकिन दो ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया। अब वह रिटायर होने से एक दिन पहले आप विधायकों की सदस्यता रद्द करने का फैसला सुना रहे हैं।
सौरभ भारद्वाज ने सवाल किया कि जब लाभ के पद में कोई लाभ हुआ ही नहीं, तो सदस्यता रद्द करने की वजह क्या है। आयोग का फैसला पूरी तरह गलत है। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री के सलाहकार नागेंद्र शर्मा का कहना है कि इस मामले में चुनाव आयोग ने आप का पक्ष नहीं सुना।
आयोग के इतिहास में यह पहला मामला होगा, जिसकी मेरिट के आधार पर सुनवाई नहीं हुई। इस मामले में भाजपा को घसीटते हुए नागेंद्र शर्मा का कहना है कि भाजपा अपने एजेंटों के जरिए चुनाव आयोग की गरिमा को दांव पर लगा रही है।
दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने आयोग के फैसले पर कहा कि पूरा मामला एक आदमी की लालच का नतीजा है। इससे 20 विधायकों की सदस्यता खत्म हुई है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर हमला बोलते हुए मिश्रा ने कहा कि वह बिल्कुल अंधे हो गए हैं।
इसका खामियाजा 20 विधायकों को चुकाना पड़ा। मिश्रा का दावा है कि इनमें से कोई भी विधायक पद मांगने के लिए केजरीवाल के पास नहीं गया था। लेकिन केजरीवाल चाहते थे कि सरकार के पैसे से विधायकों को दफ्तर, गाड़ी, वेतन व घर दिए जाएं।
बाद में इन्हीं संसाधनों का इस्तेमाल करके दूसरे राज्यों में पार्टी का जनाधार बनाया जाए। मिश्रा ने तंज कसा कि जो लोग सेवक बनने आए थे, वह मालिक बनकर बैठ गए हैं। उपचुनाव में सभी बीस सीटों पर आप की जमानत जब्त होगी।