दूसरी तरफ प्रशांत भूषण ने लिखा कि महान आदर्शों से प्रेरित होकर पार्टी बनाने वालों या इसका हिस्सा बनने वालों का मोहभंग होने सिलसिला चल निकला है। इनकी लिस्ट लंबी होती जा रही है। वह बड़ी उम्मीदों का पल था। लेकिन एक व्यक्ति की अनैतिक महत्वाकांक्षा व विजन की कमी से सब-कुछ नष्ट हो गया है। यह केस स्टडी हो सकती है कि किसी संगठन व आंदोलन को कैसे खत्म किया जाता है।
इसके अलावा आप की एनआरसी सेल से जुड़े व अमेरिका में रहने वाले मुनीष रायजादा ने लिखा कि सब स्व ध्येय के लिये आये थे। चंदा चुराने वाले गैंग में फूट पड़ गई है। जबकि लंदन में रहने वाले जय नाथ मिश्रा का कहना है कि आप की शुरुआत आम आदमी से हुयी थी, लेकिन इसमें बेशर्म आदमी घुस आये हैं।
करीब एक हफ्ते पहले आशुतोष के इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल काफी सक्रिय दिखाई दिए थे। आशुतोष का इस्तीफा इस जन्म में स्वीकार न होने की बात करते हुए उन्होंने पार्टी से जुड़े रहने की अपील भी की थी। वहीं, दूसरे नेताओं ने आशुतोष को मनाने की भी कोशिश की थी। यहां तक कि वरिष्ठ नेता दिलीप पांडेय व गोपाल राय नोएडा स्थित आशुतोष के घर तक गए थे। लेकिन आशीष खेतान के इस्तीफे पर केजरीवाल समेत पूरी पार्टी शांत है।
अरविंद केजरीवाल की आशीष खेतान के इस्तीफे पर खामोशी के बाद पार्टी के किसी दूसरे नेता ने भी कोई बयान नहीं दिया है। वहीं, कहीं से खेतान को मनाने की पहल भी नहीं हुयी है। अनौपचारिक तौर पर पार्टी आशीष खेतान के स्पष्टीकरण को ही आगे कर रही है। हालांकि, किसी बड़े नेता ने खेतान के ट्वीट को रि-ट्वीट तक नहीं किया है।