एम्स जैसे सरकारी चिकित्सीय संस्थान में भी आर्थिक रुप से कमजोर मरीज अपनी बीमारी का इलाज नहीं करा पाते और एम्स-प्रशासन भी ऐसे मरीजों का इलाज बिना पैसे के करने में असमर्थतता जता चुका है।
ऐसे ही गरीब मरीजों के इलाज के लिए एम्स के डिप्टी सेक्रेटरी संजीव चतुर्वेदी ने रमण मैग्सेसे अवॉर्ड के तहत मिली राशि करीब 20 लाख रुपये गरीब मरीजों के इलाज के लिए एम्स को दान की दी थी लेकिन एम्स ने इस राशि को लेने से इनकार कर दिया है।
जिसके बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने संजीव को इस रकम को राष्ट्रीय आरोग्य निधि में दान करने के लिए कहा है। एम्स और संजीव चतुर्वेदी के बीच शह-मात जैसा खेल पिछले करीब एक वर्ष से लगातार जारी है।