दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा था कि मार्केट में एंटी डिप्थीरिया सीरम उपलब्ध हैं। निगम मदद मांगे तो वह दवाएं खरीदने में उनकी मदद कर सकते हैं। इस पर मेयर आदेश गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार इस मामले में भी राजनीतिक रोटी सेंक रही है।
गुप्ता का कहना है कि सीरम बाजार में तो उपलब्ध हैं लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइड लाइंस के मुताबिक बाहर से सीरम की खरीद नहीं की जा सकती। चूंकि यह सीरम घोड़े के खून से बनते हैं, इसलिए सरकारी कंपनी पर ही भरोसा किया जा सकता है।
कसौली स्थित सीआरआई के निदेशक डॉ. अजय कुमार तेहलान ने बताया कि इस वक्त उनके पास एंटी डिप्थीरिया सीरम के 200 वाइल तैयार हैं। उनके यहां कभी भी सीरम बनाने का काम बंद नहीं हुआ है। हमने दिल्ली के महर्षि वाल्मीकि अस्पताल प्रबंधन को सीरम उठाने की सूचना भी दी थी, लेकिन वहां से कोई भी लेने नहीं आया।
चूंकि सीरम को मांग के अनुरूप ही तैयार किया जाता है। इसलिए अस्पताल की मांग के आधार पर ही सीरम इंजेक्शन तैयार कराए गए थे। जबकि अस्पताल चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुशील गुप्ता का कहना था कि सीरम कसौली में बनना बंद है। इसलिए यहां आपूर्ति नहीं हो सकी है। उन्होंने सीआरआई को पत्र लिख सिंतबर माह के अंत तक सीरम कैसे भी उपलब्ध कराने के लिए लिखा है। इन बयानों के बाद स्थिति साफ है कि दिल्ली में गरीब बच्चों की जिंदगियों को लेकर किस तरह लापरवाही बरती गई है?