चिड़ियाघर में सफेद बाघिन के शावकों की मौत का सिलसिला नहीं थम रहा है। अब यहां सफेद बाघिन कल्पना के जन्मे छह शावकों में से पांच की मौत हो गई है।
इस बात को लेकर दिल्ली चिड़ियाघर में जीवों के रखरखाव पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। लेकिन इसी बीच चिड़ियाघर के एक क्यूरेटर ने यह कहकर सबको चौका दिया है कि बच्चों के मरने का कारण खुद सफेद बाघिन है।
उनका कहना है कि बाघिन ने अपने बच्चों का ध्यान उस तरह से नहीं रखा, जैसे रखना चाहिए था। वहीं दूसरी ओर एक मुख्य कारण यह भी बताया कि सफेद बाघिन की अनुवांशिक क्षमता और रोग निरोधी क्षमता कमजोर है। एक साल के भीतर यहां नौ शावकों व सफेद बाघिन खुशी की मौत हो चुकी है।
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दिल्ली चिड़ियाघर में मंगलवार को सफेद बाघिन कल्पना ने छह शावकों को जन्म दिया था, लेकिन जन्म के पांच दिन के अंतराल में ही पांच शावकों की मौत हो गई।
बताया गया है कि सफेद बाघिन ने शावकों की देखभाल नहीं की और न ही उन्हें दूध पिलाया, जिसकी वजह से शावक कमजोर होते गए। इसके बाद उन्हें देखभाल व इलाज के लिए जू अस्पताल भेजा गया।
यहां उन्हें बकरी का दूध दिया गया, लेकिन पांच शावकों ने दम तोड़ दिया। चिड़ियाघर के अधिकारियों ने बताया कि शावकों को बचाने के लिए डॉक्टरों की टीम लगाई गई थी।
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जू कीपर्स भी दिन-रात उस पर ध्यान रखे हुए थे। इसके बावजूद शावकों को बचाया नहीं जा सका। सूत्रों का कहना है कि चार शावकों की मौत सफेद बाघिन के बाड़े में और एक शावक की मौत जू अस्पताल में हुई।
चिड़ियाघर के प्रवक्ता आरए खान ने बताया कि सफेद बाघिन कल्पना के शावकों की मौत होने का दुख है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी संक्रमण और कमजोरी की पुष्टि हुई है। सफेद बाघिन अपने शावकों की देखभाल नहीं कर रही थी।
बकरी के दूध पर जिंदा है एक शावक
कल्पना के एकमात्र जीवित शावक को चिड़ियाघर अस्पताल में रखा गया है। जू के डॉक्टरों की निगरानी में रखे गए शावक को जीवित रखने के लिए बकरी का दूध दिया जा रहा है। फिलहाल चिड़ियाघर प्रशासन शावक के लिए डॉगी के दूध की व्यवस्था करने में जुटा है, लेकिन अभी तक तक इसकी व्यवस्था नहीं हो सकी है।