पूरे देश में उबाल था। मंदिर बनाने की दृढ़ इच्छा के साथ अन्य राज्यों की तरह ही दिल्ली से भी अयोध्या के लिए सौ से अधिक लोग निकल पड़े थे। जगह-जगह लोगों को हिरासत में लिया जा रहा था। महज पंद्रह लोग ही अयोध्या पहुंच पाए थो।
जैसे ही सरयु पुल के पास पहुंचे प्रशासन की तरफ से फायरिंग शुरू हो गई। बंदूक की एक गोली बिलकुल सीने के करीब से गुजरी। लेकिन मंदिर बनाने की प्रेरण ने कदम को रोकने नहीं दिया। यह कहना है कि 1990 दिसंबर में दिल्ली से अयोध्या के लिए कूच करने वाले कारसेवक धर्मवीर शर्मा का।
बकौल धर्मवीर शर्मा कठिन यात्रा थी। लेकिन जनमानस का सहयोग था। जहां भी ठिकाना बनाते थे वहां गांव के लोगों का सहयोग रहता था। एक गांव से दूसरे गांव पहुंचाने की भी जिम्मेदारी उनकी थी।
उम्र करीब 30 साल की रही होगी लेकिन मन में सभी कारसेवकों की एक ही इच्छा थी कि अयोध्या कैसे पहुंचे। जगह-जगह फायरिंग व पुलिस प्रशासन से बचते हुए सरयू तक पहुंचने में कामयाब हो पाए थे। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से अब राजनीतिक रोटियां लोग सेकना बंद कर देंगे। अदालत के फैसले ने मुस्लिम पक्ष को भी संतुष्ट किया है। संतुलित फैसला आया है।