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कोरोना दे गया चोरी का 'रोग': चोर के निशाने पर रहते थे अस्पताल... डॉक्टरों से करता नफरत; हैरान कर देगा ये मामला

Thu, 17 Apr 2025 11:04 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

सरिता विहार थाने में अपोलो अस्पताल में चोरी की शिकायत दर्ज होने के बाद आरोपी विकास को पहाड़गंज के एक होटल से 14 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया, यहां से 10 अप्रैल को ऑन्कोलॉजी ओपीडी से एक लैपटॉप और मोबाइल फोन चोरी कर लिया था।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : AI
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विस्तार
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दक्षिण-पूर्वी जिले के एंटी नारकोटिक्स स्क्वॉड (एएनएस) ने चोरी की कई वारदात करने वाले बीटेक स्नातक डिग्री होल्डर युवक को पहाड़गंज के एक होटल से गिरफ्तार किया है। पुणे निवासी विकास कोविड के उपचार के कारण कर्ज में डूब गया था, इसलिए डॉक्टरों से नफरत करने लगा था और चोरी की वारदात करने लगा। आरोपी दिल्ली-एनसीआर, जयपुर, मुंबई और पुणे के कई अस्पतालों में चोरी की वारदात को अंजाम दे चुका है।

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दक्षिण-पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त रवि कुमार सिंह ने बताया कि एमआईटी पुणे से कंप्यूटर साइंस स्नातक विकास ने एंटी नारकोटिक्स स्क्वॉड प्रभारी विष्णुदत्त को बताया कि वर्ष 2021 में कोरोना महामारी के दौरान चिकित्सा बिलों पर रियायत के उसके अनुरोध को पुणे के एक अस्पताल ने ठुकरा दिया था, जिससे उसे गंभीर वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा, तब से डॉक्टरों से नफरत करने लगा था, इसलिए अस्पतालों से उपकरण चोरी करना शुरू कर दिया।

पुलिस उपायुक्त ने बताया कि विकास ने द्वारका के मणिपाल अस्पताल, वसंत कुंज के फोर्टिस अस्पताल और नोएडा के मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में चोरी करने की बात कबूल की है। सरिता विहार थाने में अपोलो अस्पताल में चोरी की शिकायत दर्ज होने के बाद आरोपी विकास को पहाड़गंज के एक होटल से 14 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया, यहां से 10 अप्रैल को ऑन्कोलॉजी ओपीडी से एक लैपटॉप और मोबाइल फोन चोरी कर लिया था।

पुलिस उपायुक्त ने बताया कि पुलिस ने सीसीटीवी कैमराें की फुटेज और निगरानी का उपयोग करके आरोपी को ट्रैक किया। आरोपी के कब्जे से चार लैपटॉप, एक मोबाइल फोन, एक एयरपॉड, महंगे चश्मे, 6100 रुपये नकद और चोरी की वस्तुओं को बेचने के लिए नकली चालान बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली जाली बिल बुक बरामद की गई।

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अस्पतालों को ऑनलाइन सर्च करता था
पुलिस उपायुक्त ने बताया कि विकास पहले बड़े अस्पतालों को ऑनलाइन सर्च करता था। इसके बाद खाली ओपीडी और डॉक्टरों के चैंबर जैसे एरिया को स्कैन करता और फिर मरीज का तीमारदार बनकर चोरी की वारदात को अंजाम देता था। वह सिम कार्ड का इस्तेमाल नहीं करता था, ट्रैकिंग से बचने के लिए कनेक्टिविटी के लिए वाई-फाई का उपयोग करता था।

जयपुर में लगातार 21 दिन चोरियां
8 अप्रैल को दिल्ली पहुंचने से पहले आरोपी विकास ने जयपुर में 21 दिन लगातार चोरियां कीं। आरोपी पुणे और मुंबई में हुईं चोरी की छह वारदात से भी जुड़ा हुआ है।
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जाली बिल बुक बना रखी थी
पुलिस उपायुक्त ने बताया कि आरोपी ने जाली बिल बुक भी तैयार कर रखी थी। वह इसका इस्तेमाल नकली बिक्री चालान बनाने के लिए करता था, साथ ही इसका इस्तेमाल चोरी के इलेक्ट्रॉनिक सामान को सेकेंड-हैंड बाजारों में बेचने के लिए करता था।



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