arvind kejriwal
क्या ऐसे शब्द भी होते हैं जो शब्दकोशों में दर्ज न हों! जवाब है बिल्कुल होते हैं और ‘ठुल्ला’ भी एक ऐसा ही शब्द है जो इन दिनो चर्चा में है। हिन्दी क्षेत्र में ‘ठुल्ला’ शब्द से खाकी वर्दी पहने ऐसे पुलिस वाले की छवि दिमाग में कौंधती है जो तुंदियल है। मैली, सिलवटदार वर्दी पहने, पान चबाए लापरवाह मुद्रा में या तो कुर्सी पर पसरा है या चौराहे पर किसी न किसी को ताड़ रहा है। सामान्यतौर पर आम लोग सिपाही से लेकर कांस्टेबल और हेडसाब तक को इस शब्द के दायरे में रखते हैं। इस तरह ‘ठुल्ला’ शब्द की अर्थवत्ता अगर निर्धारित ही करनी हो तो कामचोर, निष्क्रिय, लापरवाह और जबर्दस्ती रौब गालिब करने का आदी पुलिसवाला है।