तीन कमरे वाले जितेंद्र के मकान में लगी ढाई गुणा तीन फीट की खिड़की अग्निकांड का राज खोलेगी। जांच एजेंसियों के लिए ये खिड़की अहम सुराग मानी जा रही है।
क्योंकि इस पूरे मामले में कई ऐसे पेंच हैं जो घटना को और भी नजरिए से सोचने को मजबूर करते हैं। खुद जितेंद्र द्वारा लिखवाई गई एफआईआर भी कई सवाल खड़े कर रही है। इन्हीं कड़ियों और सबूतों को जोड़कर जांच एजेंसियों को घटना के राज को खोलना है।
दरअसल जितेंद्र के मकान के दाहिने ओर जो खिड़की लगी है। वहीं से ज्वलनशील पदार्थ फेकने की बात कही जा रही है। ढाई फीट चौड़ी खिड़की में आठ सरिये लगे हुए हैं। उन सरियों की बीच की दूरी करीब तीन इंच है।
इस तीन इंच की जगह के सहारे बोतल से ज्वलनशील पदार्थ अंदर फेकना आसान नहीं है। मान भी लिया जाए कि इसी के सहारे ज्वलनशील पदार्थ फेका गया तो उसका खिड़की पर गिरना तय है। जब पदार्थ खिड़की पर गिरा तो वह जला क्यो नहीं। ये जांच के लिए अहम सुराग माना जा रहा है।
जितेंद्र ने अंधेरे में आरोपियों को कैसे पहचाना?
सदर थाने में लिखवाई गई एफआईआर में पीड़ित जितेंद्र का कहना है कि रात 2:30 बजे जब वह कमरे का गेट खोला तो आरोपी बलवंत, जगत, ऐदल, और नौनिहाल घुस आए थे।
जबकि जोगिंद्र, सूरज, खिल्लू, आकाश,अमन, संजय, धर्म सिंह व देशराज बाहर खडे़ थे। सवाल यह उठता है कि ढाई बजे रात पीड़ित बाहर खड़े आरोपियों को कैसे पहचान लिया। खासकर तब जब घर में आग लगी हो और चार आरोपी उसी के कमरे में घुसे हों।
खिड़की से एक फीट दूरी पर है बेड:
-जिस बेड पर मासूम वैभव और दिव्या जलकर मौत के शिकार हो गए वह बेड दाहिनी ओर लगी खिड़की से एक फीट की दूरी पर है। ज्वलनशील पदार्थ फेकने के दौरान उसे नीचे जमीन पर भी गिरना चाहिए था जो नहीं गिरा। यही नहीं बेड का सिराहना पूरी तरह से सुरक्षित है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि अग्निकांड में सिराहना क्यों नहीं जला।
किसी भी दीवार पर खरोच आदि के निशान नहीं-
रात के वक्त जितेंद्र के मकान का गेट अंदर से बंद था। बाहर से आने वाले व्यक्ति को घर में प्रवेश करने के लिए गेट अथवा दीवार को फांदना पड़ेगा।
लेकिन वहां न तो दीवार पर खरोच के निशान हैं और न ही गेट पर मिले है। सवाल यह है कि आरोपी घर के अंदर घुसे कैसे। इस अग्निकांड में कई ऐसे पेंच हैं जिसे सुलझाना जांच एजेंसियों के लिए चुनौती भरा होगा।