वैभव कृष्ण ने वीडियो को फर्जी करार दिया
बहरहाल, एसएसपी वैभव कृष्ण ने कहा था कि उन्हें बदनाम करने के लिए अराजक तत्वों ने आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर जारी किया है। एसएसपी वैभव कृष्ण ने मीडिया को बताया था कि छेड़छाड़ कर बनाए (मार्फ्ड) वीडियो व्हाट्सएप पर जारी किए गए हैं। यह साजिश का हिस्सा है और उनकी छवि खराब करने के मकसद से ऐसा किया गया है। इस तरह की कोशिश एक माह पहले भी की गई थी।
सीएम योगी ने लिया संज्ञान
दो जनवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया। उन्होंने मामले पर आईजी रेंज मेरठ आलोक सिंह से जांच रिपोर्ट मांगी। शुक्रवार यानी तीन जनवरी को मेरठ जोन के एडीजी प्रशांत कुमार ने प्रेसवार्ता बुलाकर कहा कि एसएसपी गौतमबुद्धनगर वैभव कृष्ण से संबंधित जितनी भी शिकायतें हैं, उन सबकी जांच की जा रही है। एडीजी ने गोपनीय पत्र को सार्वजनिक करने को पुलिस सेवा नियमावली का उल्लंघन करार दिया था। उन्होंने आईजी मेरठ के जरिए इस मामले में नोएडा के एसएसपी से 24 घंटे में स्पष्टीकरण भी मांगा था।
इसके बाद सोमवार को मेरठ के आईजी आलोक सिंह लखनऊ पहुंचे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी व डीजीपी की भेंट हुई, जिसे लेकर खासी चर्चा रही। मंगलवार, सात जनवरी को मेरठ के आईजी आलोक सिंह ने नोएडा के एसएसपी वैभव कृष्ण का स्पष्टीकरण डीजीपी ओपी सिंह को सौंप दिया।
बुधवार से ही शुरू हो गई थी निलंबन की तैयारी
इसके बाद बुधवार यानी आठ जनवरी को उत्तर प्रदेश डीजीपी ओपी सिंह छुट्टी से लौटे तो सीएम योगी ने उन्हें तलब किया, जिसके बाद से नोएडा एसएसपी वैभव कृष्ण को निलंबित करने की तैयारी शुरू कर दी गई थी।
आज गुजरात के फॉरेंसिक लैब से रिपोर्ट आते ही वैभव कृष्ण को सस्पेंड कर दिया गया। फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट में वह वीडियो और चैट सही पाए गए हैं, जिसे वैभव कृष्ण ने फर्जी बताया था। फॉरेंसिक जांच में सामने आया है कि वीडियो एडिटेड और मार्फ्ड नहीं था।