- डीडीए यमुना जैव विविधता पार्क में मनाया विश्व नमभूमि दिवस
-विशेषज्ञों ने नमभूमि के महत्व पर साझा किए विचार
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने सोमवार को यमुना जैव विविधता पार्क में विश्व नमभूमि दिवस मनाया। इस वर्ष की थीम नमभूमि और पारंपरिक ज्ञान: सांस्कृतिक विरासत का उत्सव रही। कार्यक्रम में डीडीए के उपाध्यक्ष डॉ. एन. सरवन कुमार ने भूमि प्रबंधन और प्रशासन की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नमभूमि प्राकृतिक आपदाओं, विशेषकर बाढ़ जैसे खतरों से शहरों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
दिल्ली के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा डीडीए के पार्कों के अंतर्गत आता है, जो आम जनता के लिए खुले हैं। साथ ही, डीडीए द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय के सीईएमडीई के सहयोग से विकसित किए सात जैव विविधता पार्क दिल्लीवासियों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में अहम योगदान दे रहे हैं। डॉ. कुमार ने यमुना के बाढ़ मैदानों से अतिक्रमण हटाने, बांसेरा और असिता पार्कों के विकास के बारे में भी बताया। छात्रों को इन स्थलों को देखना और समझना चाहिए। पर्यावरणविद प्रोफेसर सीआर बाबू ने कहा कि दुनिया की सभी नदियों का उदगम नमभूमि से ही होता है। चाहे वे हिमनद हों, झीलें हों या तालाब। ग्रह का अस्तित्व नमभूमि के संरक्षण और पुनर्स्थापन पर निर्भर करता है। विश्व की 87 प्रतिशत से अधिक नमभूमि या तो समाप्त हो चुकी हैं या अत्यधिक खराब अवस्था में हैं, जो एक गंभीर पर्यावरणीय चुनौती है। इस मौके पर दिल्ली विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग के डॉ. शशांक शेखर ने कहा कि नमभूमि नदियों के प्रवाह को बनाए रखने में मदद करती हैं। बाढ़ मैदानों पर विकसित जैव विविधता पार्क पोषक तत्वों के संतुलन को नियंत्रित करते हैं। यह प्रदूषण को कम करते हैं और नदियों को अतिरिक्त पोषक तत्वों के बोझ से बचाते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के बिजनेस इकोनॉमिक्स विभाग की प्रोफेसर यामिनी गुप्ता ने बताया कि वैश्विक स्तर पर नमभूमि का मूल्य लगभग 26.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर आंका है, जो कई देशों की सकल घरेलू उत्पाद से भी अधिक है। कार्यक्रम में 350 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेज के छात्र-छात्राएं शामिल रहे। इनके अलावा शोधकर्ता, यूपीएससी अभ्यर्थी, शिक्षाविद, पत्रकार, प्रकृति प्रेमी, स्थानीय समुदायों के सदस्य और डीडीए के अधिकारी भी कार्यक्रम का हिस्सा बने।