दिल्ली के अस्पतालों के मेडिकल वेस्ट से टीएचए डंपिंग ग्राउंड बनता जा रहा है। मेडिकल वेस्ट वातावरण के लिए बहुत हानिकारक साबित हो रहा है।
बोतलों को बेचने के लालच में लोग दवाओं को नालियों में खाली कर रहे हैं। इनके संपर्क में आने से एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी, चर्म रोग समेत आदि खतरनाक बीमारियां हो सकती हैं।
दिल्ली के अस्पतालों का मेडिकल का वेस्ट टीएचए के भोपुरा, गरिमा गार्डन और विक्रम एंक्लेव में डाला जा रहा है।
मेडिकल वेस्ट में आई एक्सपायर दवाएं, सिरिंज, ग्लूकोज की खाली बोतलें, मरीजों के शरीर पर प्रयोग किए जाने वाला अन्य सामान एवं उपकरण आदि वातावरण के लिए घातक साबित हो सकते हैं।
एक्सपायर दवाएं और ग्लूकोज की बोतलों को नालियों में गिरा कर खाली किया जाता है। इससे दवाएं पानी में जाकर मिल रही हैं, जो लोगों में बीमारियां पैदा कर सकती हैं।
कूडे़ से बेचने योग्य चीजों को बीनने वाले लोग 15 दिन से 30 दिन में टिटनेस का इंजेक्शन लगवाकर अपनी सुरक्षा कर रहे हैं।
इस तरह के धंधे में लगे छोटे बच्चे, महिलाएं और पुरुष सौ से दो सौ रुपये के लिए जान जोखिम में डाल अपनी गुजर-बसर कर रहे हैं।
धंधे में लगे रहे एक बच्चे की दो साल पहले मौत हो चुकी है। हालांकि बच्चे के मरने के कारणों का पता नहीं चल पाया था।
लोगों की मानें तो मेडिकल वेस्ट की बीमारी से बच्चे की मौत हुई थी। इस धंधे की ओर स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम मूकदर्शक बने हुए हैं।