पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच बढ़ते गैस संकट और कालाबाजारी से परेशान मजदूरों ने गांव का रुख करना शुरू कर दिया है। लक्ष्मी नगर, रघुवरपुरा और गांधी नगर मार्केट जैसे बड़े बाजारों से एक-एक करके मजदूर गांव लौटने लगे हैं। ऐसे में व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। परेशान व्यापारी मजदूरों को समझा रहे हैं कि यहां स्थिति जल्द सामान्य हो जाएंगी। दरअसल, मजदूरों के पलायन करने से सारे काम रुक जाएंगे।
गांधीनगर के रघुवर पुरा शॉपकीपर एसोसिएशन के प्रधान पवन जिंदल ने बताया कि अगर गैस संकट के बीच सारे मजदूर अपने गांव चले जाएंगे, तो व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। कारोबार में नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसका असर उत्पादन क्षमता पर देखने को मिलेगा। उन्होंने बताया कि मजदूरों का कहना है कि जितनी मजदूरी उन्हें यहां मिलती है, उतनी मजदूरी उन्हें गांव में भी मिल जाती है।
गांव में घर का किराया भी नहीं देना पड़ता है। यही वजह है कि ज्यादातर मजदूर अपने गांव की ओर रवाना हो रहे हैं। उनका यहां रहना लगभग अंसभव सा हो रहा है। गांधीनगर में कपड़े को छोटे-छोटे दुकानों तक पहुंचाने वाले सीतामढ़ी, बिहार निवासी लक्ष्मण कुमार ने बताया कि जितनी कमाई नहीं होती, उससे ज्यादा तो उनके रुपये खाने-पीने पर खर्च हो जाते हैं।
दिहाड़ी गैस भराने में हो रही खर्च तो यहां रुककर क्या फायदा
लक्ष्मण कुमार ने बताया कि वह दिन का 600 से 700 रुपये कमा पाते हैं। बाजारों में दुकानदार अब एक किलो गैस भरने के लिए 400 से 500 रुपये मांगने लगे हैं। अब ऐसे में घर का किराया कैसे भरेंगे। घर रुपया कहां से भेजेंगे और तो और खाना कैसे खाएंगे। उन्होंने बताया कि इसी वजह से वापस गांव जा रहे हैं। गोरखपुर, उत्तर प्रदेश निवासी सुमित ने बताया कि 500 से 600 रुपये तो मजदूरी गांव में मिल जाती है। वहां, न घर का किराये देने का झंझट है और न गैस के लिए परेशान होना है। उन्होंने कहा कि घर पर रहेंगे, तो कम से कम दो वक्त की रोटी तो खा पाएंगे।
बाजारों में बंद हो रहीं छोटी दुकानें
राजधानी के बाजारों में जहां कभी शाम होते ही खाने-पीने की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ पड़ती थी, वहीं अब कई दुकानें बंद पड़ी नजर आ रही हैं। इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह एलपीजी सिलिंडर की कीमतों में हुई अचानक बढ़ोतरी है, जिसने छोटे दुकानदारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है।
करोल बाग, लाजपत नगर, चांदनी चौक, सरोजिनी नगर, आरके पुरम और सदर बाजार समेत कई बाजारों में गैस की कमी के कारण खाने पीने की कई छोटी दुकानें बंद हो गई हैं। दुकानदारों के अनुसार, कुछ समय पहले तक जो एलपीजी सिलिंडर 3000 रुपये के आसपास मिल जाता था, उसकी कीमत अब 4500 रुपये तक पहुंच गई है। सरोजिनी नगर मार्केट में चाट की दुकान चलाने वाले राजेश कुमार ने बताया कि पहले एक दिन में जितनी कमाई होती थी। उससे आसानी से गैस, सामान और बाकी खर्च निकल जाता था। लेकिन अब सिलिंडर इतना महंगा हो गया है कि हर बार खरीदना मुश्किल लगने लगा है।
आरके पुरम में मोमोज का स्टॉल लगाने वाले मोहम्मद इरफान ने बताया कि हमने करीब एक महीने पहले दुकान बंद कर दी। रोज का खर्च निकलना मुश्किल हो गया था। गैस के साथ-साथ सब्जियों और अन्य सामान की कीमतें भी बढ़ गई हैं। ऐसे में घाटा सहना मुश्किल हो गया है। करोल बाग में गोलगप्पे बेचने वाली मीना ने बताया कि अगर हम प्लेट का दाम 10 से 20 रुपये भी बढ़ाते हैं, तो ग्राहक तुरंत मोलभाव करने लगते हैं या दूसरी दुकान पर चले जाते हैं।