दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कृत्रिम वर्षा हाल-फिलहाल कराना संभव नहीं है। आईआईटी कानपुर के संबंधित प्रोफेसर ने कहा है कि मौसमी स्थितियां ऐसी नहीं बन पा रही हैं, जिससे इसके लिए प्रयास किया जा सके।
उन्होंने बताया कि कृत्रिम वर्षा के लिए कुछ बूंदों वाले बादलों की भी जरूरत होगी। बरसने वाले बादलों का इंतजाम हो इसके लिए एक विमान की भी जरूरत होगी। ऐसे में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय से इस संबंध में मंजूरी का भी इंतजार किया जा रहा है।
आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर ने कहा कि बादलों में कई तरह के रसायन को छोड़कर हल्की बूंदों वाले बादलों को वर्षा में तब्दील किया जाता है। इसके लिए सिल्वर आयोडाइड, सूखी बर्फ और साधारण नमक जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। वर्षा की मात्रा और उसमें बदलाव को लेकर इनकी मात्रा तय की जाती है।
प्रदूषण कम करने के लिए कृत्रिम वर्षा का प्रस्ताव केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का था। इस परियोजना में आईआईटी कानपुर सहयोग कर रहा है। आईआईटी दिल्ली के छात्र भी इस परियोजना में शामिल हैं।