शहर में हर बैंक के बाहर रोजाना सुबह से ही लोगों की कतारें लग रही हैं लेकिन एक बैंक ऐसा भी है, जहां कोई कतार आपको दिखाई नहीं देगी। यहां से किसी को निराश भी नहीं लौटाया जा रहा है। बैंक के बाहर लगे सूचना पट्ट पर लगी टैगलाइन भी लोगों को आकर्षित कर रही है।
जिसे पढ़, लोगों के मुंह से बस यही शब्द निकल रहे हैं कि काश, हमारा भी खाता इस बैंक में होता। नोटबंदी के बाद एनआईटी पांच स्थित इलाहाबाद के बाहर लोगों की खासी भीड़ जुट रही थी, लेकिन बैंक प्रबंधन ने क्राउड मैनेजमेंट की ठोस प्लानिंग की, जो अब सफल साबित हो रही है।
यहां बैंक हर व्यक्ति को उसकी मांग के अनुरूप भुगतान कर रहा है ताकि वही व्यक्ति बार बैंक के चक्कर ना लगाए। बैंक प्रबंधन तीन दिन तक कैश का इंतजार किए बिना खुद करंसी चेस्ट से कैश लेने पहुंच रहा है। इसके चलते बैंक में कैश की किल्लत नहीं है।
दूसरा सबसे बड़ा कदम नियमानुसार ग्राहकों की जरूरत के मुताबिक कैश देने का उठाया गया है। बैंक के सहायक महाप्रबंधक रमण महाजन ने बताया कि किसी को 20 हजार रुपये की जरूरत है, उसे सिर्फ पांच हजार रुपये दिए जाएंगे तो दो दिन बाद वह फिर लाइन में लगेगा।
ऐसे में भीड़ कम होने वाली नहीं है। इससे अच्छा है कि उसे एक बार में भुगतान किया जाए। इस व्यवस्था को अपनाने से बृहस्पतिवार से शनिवार तक कैश निकालने वाले खाताधारकों की संख्या में कमी आई। सुबह 7 बजे से 10 बजे के बीच बैंक पहुंचने वाले ग्राहकों को प्राथमिकता दी जा रही है।