सरकार ने बुधवार को किसानों को कृषि कानून में संशोधन का लिखित प्रस्ताव भेजा। 19 पन्नों के इस प्रस्ताव को दरकिनार का किसानों ने आंदोलन को लंबा खींचने की तैयारी शुरू कर दी है। चिल्ला बॉर्डर पर धरना दे रहे भारतीय किसान यूनियन (भानु) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह ने कहा कि किसान आयोग के गठन की घोषणा जब तक नहीं होगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि हमारी प्रमुख मांग किसान आयोग के गठन की है। सरकार इसकी घोषणा कर दे, हम आंदोलन खत्म कर वापस अपने घरों को चले जाएंगे। उन्होंने साफ किया कि कृषि कानूनों में संशोधन उन्हें मंजूर नहीं। कानूनों को वापस लिया जाना चाहिए। किसान आयोग का गठन किया जाना चाहिए। किसान आयोग फसल का दाम तय करेगा।
बुधवार को चिल्ला बॉर्डर पर किसानों की महापंचायत बुलाई गई थी। लेकिन यूपी के कई जिलों से आ रहे किसानों को पुलिस ने रास्ते में ही रोक लिया। जिसकी वजह से महापंचायत की जगह धरना स्थल पर किसानों ने बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में आंदोलन को लंबा चलाने की रणनीति पर भी चर्चा की गई।
इन मांगों पर अड़ी भाकियू (भानु)
-किसान आयोग का गठन किया जाए, जिसमें सभी सदस्य किसान बनाए जाएं।
-आयोग का अध्यक्ष किसान हो। आयोग ही किसानों की फसल का दाम तय करे।
-किसानों के सभी तरह के बैंक कर्ज माफ किए जाए।
-कृषि सुधार के नाम पर बनाए गए तीनों कानूनों को रद्द किया जाए।
-पराली जलाने पर जुर्माने का प्रावधान खत्म हो और किसानों पर किए गए मुकदमे वापस हों।
-किसानों व मजदूरों को 60 की उम्र के बाद जीवन यापन के लिए 10 हजार रुपये प्रति माह पेंशन दी जाए।
-देश में किसानों का किसी भी फसल का जो बकाया है, उसका भुगतान 10 दिनों में किया जाए।
-प्रत्येक शहर में नहर, रजवाहा की सफाई कराकर रोस्टर के मुताबिक पानी चलाया जाए
-किसानों को 24 घंटे निशुल्क बिजली मिले।
-यमुना को हथिनी कुंड बैराज से मुक्त किया जाए। यमुना में गिरने वाले शहरों के नालों को बंद किया जाए।
-कंपोस्ट का गोबर 25 रुपये प्रति किलो खरीदा जाए और तैयार कंपोस्ट को खेती के कार्यों में इस्तेमाल किया जाए।