दिल्ली जल बोर्ड ने हाईकोर्ट में हलफनामा पेश कर यह दावा किया है कि राजधानी दिल्ली में अगर नागरिक निकाय, सार्वजनिक प्राधिकरण बारिश के पानी, गैर पीने योग्य पानी को सिंचाई, बागवानी जैसे कार्यों में इस्तेमाल किया जाए तो पानी की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सकता है। जल बोर्ड ने कहा कि इसके अलावा जल संचयन के उपायों को भी सख्ती से लागू किया जाए।
बोर्ड ने यह हलफनामा एक जनहित याचिका पर पेश किया है। जनहित याचिका में राजधानी में कम होते पानी पर चिंता जाहिर की गई है। मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर की खंडपीठ के समक्ष जल बोर्ड ने हलफनामा दाखिल कर कहा कि राजधानी की पानी की वर्तमान आवश्यकता प्रतिदिन 1140 मिलियन गैलन है। इसमें से 93.5 करोड़ गैलन भूजल और यमुना नदी के कच्चे पानी जैसे स्रोतों से आता है।
राजधानी में पानी की मांग 2021 तक 13.80 करोड़ गैलन तक बढ़ जाएगी। ऐसे में इस जरूरत को पूरा करने के लिए वर्षा जल संचयन जैसे वैकल्पिक साधनों पर काम करने की जरूरत है। इस तरह के उपायों से भूजल पर बोझ कम करने और इसे रिचार्ज करने में मदद मिलेगी।
हाईकोर्ट को जल बोर्ड ने सुझाव दिया है कि नगर निकाय और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) जैसे संस्थानों को संशोधित भवन कानून को सख्ती से लागू करना चाहिए। इसके अनुसार, 100 वर्ग गज या उससे अधिक के भूखंड के आकार के लिए वर्षा जल संचयन प्रणाली अनिवार्य है। इसके अलावा, लोक निर्माण विभाग तथा सिंचाई विभाग सहित पार्कों की देखभाल करने वाली एजेंसियों को बागवानी के लिए पीने के अयोग्य पानी का इस्तेमाल करना चाहिए।