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Delhi NCR News: जिले में ठप पड़े वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, बरसाती सीजन से पहले तैयारियां अधूरी

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डीसी के आदेशों के बावजूद नहीं सुधरी व्यवस्था, हर साल जलभराव से जूझते हैं लोग
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संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। मानसून की दस्तक से पहले जिले में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए किए जाने वाले इंतजाम कागजों तक सीमित नजर आ रहे हैं। जिले के विभिन्न सरकारी कार्यालयों, संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों पर लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अधिकांश जगहों पर ठप पड़े हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन कार्यालयों से इन व्यवस्थाओं की निगरानी होनी चाहिए, वहां भी कई स्थानों पर सिस्टम काम नहीं कर रहे हैं।
हाल ही में उपायुक्त द्वारा बरसात के मौसम को देखते हुए जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त रखने और जलभराव की समस्या से निपटने के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की सफाई, रखरखाव और संचालन को लेकर विभागों की ओर से कोई विशेष सक्रियता दिखाई नहीं दे रही है।
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जिले में पिछले कुछ वर्षों के दौरान भूजल स्तर सुधारने और बरसाती पानी के संरक्षण के उद्देश्य से विभिन्न सरकारी भवनों, स्कूलों, स्वास्थ्य संस्थानों तथा अन्य सार्वजनिक परिसरों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित किए गए थे। इन परियोजनाओं पर लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन रखरखाव के अभाव में अधिकांश सिस्टम निष्क्रिय हो गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बरसात के दौरान सड़कों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर जलभराव की स्थिति बन जाती है। यदि वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम सही ढंग से कार्य करें तो काफी मात्रा में वर्षा जल का संचयन हो सकता है और जलभराव की समस्या में भी कमी आ सकती है।
जिला सचिवालय में बने कूड़ेदान: जिला सचिवालय में लाखों रुपये खर्च कर करीब आधा दर्जन रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए बोरिंग कर केंद्र बनाए गए है। लेकिन जिले के तमाम प्रशासनिक अधिकारियों की निगाह नीचे बने ये सिस्टम चीख मारकर गवाही दे रहे है कि सरकारी योजनाओं पर सिर्फ पैसा खर्च करना ही उद्देश्य रह गया है। उनका रखरखाव न करने से जिला सचिवालय का कूड़ा इनमें डाला जा रहा है।
लोगों ने उठाए सवाल :
सामाजिक कार्यकर्ता इदरीस खान ने कहा कि सरकार और प्रशासन जल संरक्षण के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग है। लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए सिस्टम यदि बंद पड़े हैं तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
नूंह निवासी रमेश कुमार का कहना है कि बरसात के दिनों में कई इलाकों में पानी भर जाता है। वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम चालू रहें तो पानी का बेहतर उपयोग हो सकता है और लोगों को राहत मिल सकती है।
गांव उजीना के निवासी उमेश ने बताया कि सरकारी भवनों में लगे अधिकांश सिस्टम वर्षों से साफ नहीं किए गए हैं। संबंधित विभागों को समय रहते इनकी जांच कर मरम्मत करानी चाहिए।

विशेषज्ञों की राय :
पर्यावरण विशेषज्ञ शुभम के अनुसार वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम न केवल भूजल स्तर बढ़ाने में मदद करते हैं बल्कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव की समस्या कम करने का भी प्रभावी माध्यम हैं। यदि इनका नियमित रखरखाव नहीं किया जाए तो पूरी योजना का उद्देश्य प्रभावित हो जाता है।

प्रशासन से उम्मीद :
जिले के लोगों का कहना है कि मानसून पूरी तरह सक्रिय होने से पहले प्रशासन को विशेष अभियान चलाकर सभी सरकारी और सार्वजनिक परिसरों में स्थापित वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की जांच करानी चाहिए। जो सिस्टम खराब या बंद पड़े हैं उन्हें तत्काल दुरुस्त किया जाए ताकि वर्षा जल संरक्षण के साथ-साथ जलभराव की समस्या से भी राहत मिल सके।
अब देखना होगा कि उपायुक्त के निर्देशों के बाद संबंधित विभाग कितनी गंभीरता दिखाते हैं और बरसात शुरू होने से पहले इन व्यवस्थाओं को कितना दुरुस्त कर पाते हैं।
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जलभराव ना हो, जहां जो सिस्टम है उसको मानसून से पहले दुरुस्त किया जाए। इसके लिए संबंधित विभाग अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं, अगर इन आदेशों की पालना नहीं की जाती है तो ऐसे अधिकारियों कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी ।
अखिल पिलानी डीसी नूंह।
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