संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। प्रदेश सरकार द्वारा आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए शुरू किए गए सीएम विंडो और समाधान शिविरों की कार्यप्रणाली पर अब सवाल उठने लगे हैं। कई शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उनकी शिकायतों का बिना जांच-पड़ताल और तथ्यात्मक सत्यापन के निस्तारण दिखाया जा रहा है, जिससे उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है।
लोगों का कहना है कि शुरुआत में समाधान शिविरों से काफी लाभ मिला, लेकिन अब शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया कमजोर पड़ती नजर आ रही है। इसका असर शिकायतों की संख्या पर भी दिखाई दे रहा है। जिला स्तर पर जहां पहले प्रत्येक शिविर में 20 से 30 शिकायतें आती थीं, वहीं हाल के एक शिविर में केवल सात शिकायतें ही दर्ज हुईं।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कई मामलों में संबंधित अधिकारियों द्वारा शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही। पत्रकार सुरेन्द्र माथुर ने बताया कि एक जून को उनके भतीजे को आवारा कुत्ते द्वारा काटे जाने की शिकायत समाधान शिविर में दी गई थी, जिसे नगर परिषद अधिकारियों को भेजा गया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी प्रकार मास्टर हामिद सिद्दीकी ने भी आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी, जिस पर समाधान नहीं हुआ।
हामिद सिद्दीकी, मन्नू पहलवान, मनोज माथुर और हाजी काले खां सहित अन्य नागरिकों का कहना है कि पंचायत विकास कार्यों, कथित गबन, अवैध अतिक्रमण और अन्य जनसमस्याओं से संबंधित शिकायतों पर भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है। उनका आरोप है कि कई शिकायतें केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित रह जाती हैं।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक कुमार मीणा ने अधिकारियों को सीएम विंडो, जनसंवाद और सरल पोर्टल पर लंबित शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए थे।