हरियाणा में यमुना में औद्योगिक अपशिष्ट डालने की वजह से दिल्ली में पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। प्रदूषक तत्वों की बढ़ोतरी से सोमवार को एक बार फिर यमुना के पानी में अमोनिया की मात्रा अचानक बढ़ गई। यमुना में अमोनिया का मौजूदा स्तर 2.2 पीपीएम है, नतीजतन वजीराबाद, चंद्रावल और ओखला जल संयंत्रों से दिल्ली में जलापूर्ति 30 एमजीडी (मिलियन गैलन पर डे) कम हो गई है। इससे लोगों को साफ पानी मुहैया करवाने के लिए अन्य जल संयंत्रों पर दबाव बढ़ गया है। आने वाले कुछ दिनों में पानी का प्रेशर कम रह सकता है।
दिल्ली जल बोर्ड की ओर से न्यायालय से यह भी आग्रह किया जाएगा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) सहित अन्य उत्तरदायी संस्थाओं को इस प्रदूषण को रोकने के निर्देश दिए जाएं। दिल्ली उच्च न्यायालय को यह भी बताया जाएगा कि किन-किन स्रोतों से यमुना नदी में पानी आता है, जो हरियाणा सिंचाई विभाग के सीधे तौर पर नियंत्रण में हैं।
इन इलाकों में जलापूर्ति घटी
बाहरी दिल्ली, नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) के कई इलाकों, पुरानी दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली व दक्षिणी दिल्ली के कई इलाकों में जलापूर्ति प्रभावित हुई है। जल बोर्ड सामान्य तौर पर प्रतिदिन करीब 900 एमजीडी पानी की आपूर्ति करता है।
हरियाणा के विभागों की नाकामी से यमुना में बढ़ रहा है प्रदूषण
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक दिल्ली में पेयजल की जरूरत के लिए वजीराबाद रिजर्वायर को हमेशा भरा रखना है। लेकिन दिल्ली जल बोर्ड का कहना है कि वह ऐसा नहीं कर पा रहा है। वजीराबाद रिजर्वायर में प्रदूषक तत्वों में बढ़ोतरी की मुख्य वजह हरियाणा सिंचाई विभाग व अन्य संबंधित विभागों की नाकामी है।
केंद्र से अनुरोध के बाद भी नहीं मिली राहत
दिल्ली जल बोर्ड की ओर से केंद्र से भी अनुरोध किया गया है कि हरियाणा सरकार को यमुना में प्रदूषण रोकने संबंधी कदम उठाने के निर्देश दें। दिल्ली जल बोर्ड ने जल संसाधन मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय और सीपीसीबी सहित तमाम संबंधित एजेंसियों को इस संबंध में पत्र लिखा है, लेकिन अब तक कोई राहत नहीं मिली है।