आवासीय कालोनी पर टूटने का संकट बढ़ता देख जल निगम के कर्मचारी एकजुट होने लगे हैं। शैक्षिक सत्र के बीच में मकान बदलना पड़ा तो कर्मचारियों के बच्चों की पढ़ाई भी डिस्टर्ब हो जाएगी।
ऐसे में कर्मचारी जल्द ही एक संघर्ष समिति बनाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि कार्रवाई के डर से वह फिलहाल सामने आने से बच रहे हैं। लेकिन समिति बन जाने के बाद वह जीडीए अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे।
जल निगम की इस आवासीय कालोनी मे 90 मकान हैं। इनमें से ज्यादातर में कर्मचारी रहते हैं और चंद मकानों में अधिकारियों का निवास है। कालोनी के साथ-साथ जल निगम के कार्यालयों पर भी टूटने का खतरा मंडराने लगा है।
जीडीए ने भी जल निगम की 90 साल की लीज डीड खत्म कर दी। पांच सितंबर को जल निगम के अधिकारियों ने मकानों में रहने वाले कर्मचारियों को नोटिस जारी किए तो उनमें खलबली मच गई है।
कर्मचारियों का कहना है कि एकदम मकान शिफ्ट करना आसान नहीं होगा। बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हो जाएगी। उनका यह भी कहना है कि ग्रीन बेल्ट में केवल जल निगम की कालोनी ही नहीं बनी, बल्कि एक अन्य सरकारी विभाग के दफ्तर, जिले के कई बड़े अधिकारियों के आवास भी बने हुए हैं।
ऐसे में जल निगम की कालोनी को तोड़ने की कार्रवाई करना गलत होगा। कर्मचारी जल्द ही एक संघर्ष समिति का गठन कर इसके विरोध में सड़कों पर उतर सकते हैं।