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सीपीसीबी ने कहा- गंदे पानी का 100 फीसदी शोधन सुनिश्चित करे जल बोर्ड

Fri, 04 Dec 2020 05:57 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली 
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यमुना नदी में सफाई - फोटो : अमर उजाला
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यमुना में लगातार बढ़ते प्रदूषण पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने दिल्ली जल बोर्ड को गंदे पानी को शोधित करने के लिए कहा है। सीपीसीबी ने यमुना में प्रदूषण के लिए दिल्ली के 22 सालों से गिरने वाले प्रदूषित पानी को जिम्मेदार बताया है।

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सीपीसीबी द्वारा दिल्ली जल बोर्ड को बताया गया है कि गत अक्तूबर के आंकड़ों के अनुसार, यमुना में पानी की गुणवत्ता का स्तर पल्ला गांव को छोड़कर किसी भी क्षेत्र में नहाने के पानी के स्तर के बराबर भी नहीं पाया गया है। 

सीपीसीबी के अनुसार, दिल्ली के 22 नालों से गिरने वाला गंदा पानी आईटीओ और ओखला बैराज के पास यमुना को प्रदूषित कर सफेद झाग उत्पन्न करता है। ऐसे में दिल्ली जल बोर्ड घरों से निकलने वाले गंदे पानी की 100 फीसदी शोधन को  दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी के अनुसार सुनिश्चित करेगी। वहीं, किसी भी नाले में अशोधित पानी को नहीं छोड़ने के लिए भी कहा गया है।
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वहीं, पानी के उपयोग के लिए राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) द्वारा गत वर्ष सितंबर में सीवर परियोजना को लेकर तैयार की गई टाइमलाइन के अनुसार इस्तेमाल करने को कहा है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नवंबर में कराए गए परीक्षण के दौरान कुछ घाटों पर पानी में ऑक्सीजन की मात्रा में कमी पाई गई है। इससे पानी में रहने वाले जीव जंतुओं पर भी असर पड़ता है। 

कुछ घाटों पर पानी में बायोलॉजिकल ऑक्सीजन की मात्रा 3 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम पाई गई है, वहीं कुछ जगहों पर 45 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई है। पानी में ऑक्सीजन की मात्रा 5 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम होती है तो इससे जीव-जंतुओं पर असर पड़ता है। पल्ला क्षेत्र में पानी में ऑक्सीजन की मात्रा 7.5 मिलीग्राम प्रति लीटर, सूर घाट पर 6.3 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई है। 

इसके अलावा कुदेसिया घाट, आईटीओ  व निजामुद्दीन के पास पानी में ऑक्सीजन की मात्रा शून्य रही है। गौरतलब है कि पानी में सफेद झाग बनने के पीछे धोबी घाट पर नकली डिटर्जेंट के इस्तेमाल को बताया गया था, जिसमें फॉस्फेट की मात्रा अधिक होती है। इससे यमुना में प्रदूषित तत्वों को बढ़ने में मदद मिलती है।

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