केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने यमुना नदी के पानी में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को लेकर देखते हुए दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा को चेतावनी दी है। तीनों राज्यों को यमुना में बिना शोधित किए पानी छोड़ने वालों पर कार्रवाई करने और 15 दिसंबर तक कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) दाखिल करने का आदेश दिया गया है। साथ ही बिना शोधित किए सीवेज नदी में नहीं बहाए जाना सुनिश्चित करने को कहा है।
सीपीसीबी के मुताबिक, यमुना नदी का पानी अमोनिया के उच्च स्तर के कारण जहरीला हो गया है। अमोनिया का स्तर सीवर व फैक्ट्रियों का पानी बिना शोधित किए सीधे नदी में बहाए जाने के कारण बढ़ा है। सीपीसीबी ने कहा कि इसके लिए दिल्ली जल बोर्ड को कार्रवाई का आदेश दिया गया है।
सीपीसीबी की जांच में मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बंद पाए गए। इसके चलते पानीपत से दिल्ली के कालिंदी कुंज तक यमुना नदी में ऑक्सीजन की बेहद कमी, रासायनिक झाग का निर्माण और अमोनिया का बढ़ता स्तर पाया गया।
दिल्ली के 22 नालों में से 14 का गंदा पानी बिना शोधन के ही सीधा नदी में छोड़ा जा रहा है। इसी कारण सीपीसीबी ने दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को कार्रवाई करते हुए 15 दिसंबर तक कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है।