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Delhi NCR News: भाजपा नेताओं के टकराव में फंसे वार्ड समिति चुनाव, स्थायी समिति गठन भी अटका

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एमसीडी में वॉर्ड समितियों के चुनाव को लेकर भाजपा के अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आए
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विनोद डबास
नई दिल्ली। एमसीडी में वॉर्ड समितियों के चुनाव को लेकर भाजपा के अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। प्रदेश भाजपा नेताओं के बीच खींचतान के चलते 12 वॉर्ड समितियों के चुनाव अधर में लटक गए हैं। आमतौर पर मेयर चुनाव के तुरंत बाद वॉर्ड समितियों के चुनाव कराए जाते थे, लेकिन इस बार अब तक चुनाव की तारीख तय नहीं हो पाई है, जबकि मेयर चुनाव हुए एक सप्ताह से अधिक समय हो चुका है।
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश भाजपा के कई बड़े नेता अपने समर्थक पार्षदों को वॉर्ड समितियों की कमान दिलाने के लिए जोर लगाए हैं। इसी को लेकर पार्टी के भीतर सहमति नहीं बन पा रही है। राजनीतिक खींचतान का असर अब एमसीडी की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी पड़ने लगा है, क्योंकि वॉर्ड समितियों के गठन के बाद ही स्थायी समिति के सदस्यों का चुनाव संभव हो पाता है। एमसीडी की स्थायी समिति सबसे शक्तिशाली समिति मानी जाती है। इस समिति के पास वित्तीय और नीतिगत मामलों में महत्वपूर्ण अधिकार होते हैं। करोड़ों रुपये के विकास कार्यों, परियोजनाओं और विभिन्न प्रस्तावों को अंतिम मंजूरी स्थायी समिति के माध्यम से ही मिलती है। ऐसे में वार्ड समिति चुनाव लंबित रहने से स्थायी समिति का गठन भी अटका हुआ है। इससे एमसीडी के प्रशासनिक और वित्तीय फैसलों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
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वार्ड समितियों से ही स्थायी समिति के कुछ सदस्य चुने जाते हैं। इसलिए जब तक वॉर्ड समितियों का गठन नहीं होगा, तब तक स्थायी समिति का पूरा चुनाव भी नहीं कराया जा सकता। बताया जा रहा है कि भाजपा के भीतर विभिन्न गुट अपने-अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में समितियों की अध्यक्षता हासिल करना चाहते हैं। कई वरिष्ठ नेता चाहते हैं कि उनके करीबी पार्षदों को महत्वपूर्ण समितियों में जिम्मेदारी मिले, ताकि संगठन और निगम दोनों में उनका प्रभाव बना रहे। इसी कारण उम्मीदवारों के नामों पर सहमति बनने में लगातार देरी हो रही है।
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उधर, एमसीडी प्रशासन ने वार्ड समिति चुनाव कराने की तैयारियां पूरी कर रखी हैं। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही राजनीतिक स्तर पर सहमति बनेगी, चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया जाएगा। लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए जल्द समाधान निकलने की संभावना कम नजर आ रही है। वार्ड समितियों और स्थायी समिति का गठन जल्द नहीं हुआ तो इसका असर एमसीडी के कामकाज और विकास परियोजनाओं पर पड़ सकता है। विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर भाजपा को घेरने की तैयारी में हैं।
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