अधिक मतदान वाले कॉलेजों पर संगठनों का विशेष फोकस, ईवनिंग कॉलेजों के वोट भी निर्णायक
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में मुकाबला भले ही छात्र संगठनों के बीच दिखाई देता हो, लेकिन जीत-हार का समीकरण डीयू के करीब एक दर्जन ऐसे कॉलेजों में होने वाले मतदान से काफी हद तक प्रभावित होता है, जहां अन्य कॉलेजों की तुलना में मतदान अधिक रहता है। खासकर कालकाजी, दिल्ली देहात और पूर्वी दिल्ली के कॉलेजों के वोट उम्मीदवारों को बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाते हैं। वहीं, ईवनिंग कॉलेजों में होने वाला मतदान कई बार जीत-हार के अंतर को प्रभावित करता है।
डीयू के 52 कॉलेज डूसू चुनाव से संबद्ध हैं। चुनावी रणनीति बनाने वाले संगठन उन कॉलेजों पर विशेष ध्यान देते हैं, जहां एक हजार या उससे अधिक मतदान होने की संभावना रहती है। ऐसे कॉलेजों में मजबूत प्रदर्शन को केंद्रीय पैनल के उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यही वजह है कि प्रचार के दौरान प्रत्याशी और संगठन इन कॉलेजों में संपर्क अभियान तेज कर देते हैं।
कालकाजी क्षेत्र के देशबंधु कॉलेज और रामानुजन कॉलेज में अपेक्षाकृत अधिक मतदान होता है। बड़ी संख्या में वोट पड़ने के कारण इन दोनों कॉलेजों के नतीजे डूसू चुनाव के व्यापक समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं। साउथ कैंपस के शहीद भगत सिंह कॉलेज पर भी प्रमुख छात्र संगठनों की नजर रहती है।
अदिति कॉलेज, श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज, भगिनी निवेदिता कॉलेज, राजधानी कॉलेज और शिवाजी कॉलेज में भी मतदान का आंकड़ा एक हजार से ऊपर जाने पर यहां का प्रदर्शन अहम हो जाता है। इन कॉलेजों में मजबूत पकड़ केंद्रीय पैनल के उम्मीदवारों के कुल प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है।
नॉर्थ कैंपस के हिंदू कॉलेज, हंसराज कॉलेज, किरोड़ीमल कॉलेज और श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज में भी अपेक्षाकृत अधिक मतदान होता है। इनमें दो हजार से अधिक वोट पड़ने की स्थिति में इन कॉलेजों का योगदान केंद्रीय पैनल के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।
पूर्वी दिल्ली के वोट भी महत्वपूर्ण
पूर्वी दिल्ली के श्यामलाल कॉलेज और विवेकानंद कॉलेज भी अधिक मतदान वाले कॉलेजों में शामिल हैं। यहां करीब एक हजार वोट पड़ने पर इनका असर उम्मीदवारों के कुल वोटों पर दिखाई दे सकता है। पिछले वर्षों के चुनावी पैटर्न में भी अधिक मतदान वाले कॉलेज संगठनों की रणनीति के केंद्र में रहे हैं। इसलिए मतदान के दिन इन कॉलेजों में प्रचार के साथ-साथ मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाने की रणनीति पर भी विशेष जोर रहता है।