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फरीदाबाद में वोटर सुस्त, उम्मीदवार चुस्त

Sat, 08 Mar 2014 05:33 PM IST
ओम प्रकाश/अमर उजाला, फरीदाबाद
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शेख फरीद की नगरी फरीदाबाद में लोकसभा क्षेत्र बनने के बाद से अब तक कभी भी मतदान प्रतिशत अच्छा नहीं रहा। शुरुआती दौर में जनता ने वोट डालने का जो जज्बा दिखाया था वह बाद में धीरे-धीरे घटता गया।
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कभी भी यहां पर 75 फीसदी मतदान नहीं हुआ। राजनीति विज्ञान के जानकार राजेंद्र चोपड़ा कहते हैं कि शुरुआती दौर में जिन उम्मीदों को लेकर शहर के लोगों ने वोट दिया वह पूरी नहीं हुईं। जन प्रतिनिधियों ने जनता को धोखे पर धोखा दिया, जिसका परिणाम यह रहा कि लोग बूथ से दूर होते गए।

अच्छे नेता आएं और वे राजनीति को सेवा भाव की तरह लें तो जनता बूथ तक जरूर आएगी। दूसरी ओर कुछ लोगों का कहना है कि यह औद्योगिक शहर है इसलिए लोगों की जिंदगी में भागदौड़ बहुत है। ऐसे में लोग मतदान के दिन वोट करने नहीं पहुंचते। वह अपने घर पर आराम करते हैं।
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भजनलाल ने जीता था 58 फीसदी वोटरों का दिल
फरीदाबाद लोकसभा सीट से हरियाणा की राजनीति के दिग्गज नेता पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल ने भी चुनाव लड़ा था। वर्ष 1989 में कांग्रेस की टिकट पर उन्होंने जीत दर्ज की।

शहर के लोगों पर उनका जादू इतना था कि उन्होंने कुल 57.81 फीसदी वोट प्राप्त किए। यह रिकार्ड अब तक यहां पर कोई प्रत्याशी तोड़ नहीं पाया। उनसे पहले 1984 में कांग्रेस के ही रहीम खान ने भी पचास फीसदी से अधिक जनता का दिल जीता था। उन्हें 54.01 फीसदी वोट मिले थे।

...और 34 फीसदी वोट में सांसद बन गए थे बैंदा
-इस सीट पर हुए अब तक दस चुनावों में एक रिकार्ड भाजपा ने भी बनाया। यह रिकॉर्ड सबसे कम प्रतिशत वोट पाने का है। वर्ष 1998 में रामचंद्र बैंदा 33.81 फीसदी वोट पाकर ही चुनाव जीत गए।

वर्ष कुल प्रत्याशी वोट प्रतिशत 1977 7 70.81 1980 10 60.73 1984 21 61.8 1989 18 62.81 1991 23 62.68 1996 41 60.6 1998 15 65.72 1999 12 56.76 2004 14 ---- 2009 23 56
(चुनाव आयोग एवं जिला प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक)

श्रम विभाग की टास्क फोर्स सुनिश्चित करवाएगी अवकाश
श्रमिक नेता एसडी त्यागी, आरडी यादव एवं बेचू गिरी के मुताबिक जिला उपायुक्त विजय सिंह दहिया ने उन लोगों को वोट प्रतिशत बढ़ाने में सहयोग करने के लिए एक बैठक में बुलाया था। जिसमें उन्होंने कहा कि अगर श्रमिक वर्ग वोट देने निकले तो 75 फीसदी तक वोटिंग हो सकती है।

इस पर श्रमिक नेताओं ने कहा कि उद्योगपति वोटिंग के दिन या तो अवकाश नहीं देते या फिर अवकाश देते हैं तो उसके बदले काम करवाते हैं। इसलिए वोटिंग के दिन श्रमिकों का अवकाश सुनिश्चित करवाया जाए। इस पर जिला उपायुक्त ने कहा कि 10 अप्रैल को श्रम विभाग की एक टास्क फोर्स फैक्ट्रियों में निरीक्षण करेगी।
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