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दिल्ली का प्रदूषण शहरी, पराली का धुआं जिम्मेदार नहींः वीएम सिंह

Sun, 01 Dec 2019 04:43 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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vm singh - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली के प्रदूषण और पराली के धुएं का मसला अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में गरमाया रहा। किसान प्रतिनिधियों ने शनिवार को दो टूक शब्दों में कहा कि दिल्ली के प्रदूषण की प्रकृति शहरी है। इसमें पराली के धुएं की कोई भूमिका नहीं है। 

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वहीं, अगर सरकारें इसको ही प्रदूषण की वजह मान रही हैं तो किसानों को महादोषी ठहराने की जगह व्यावहारिक समाधान भी देना चाहिए। दूसरी तरफ अधिवेशन में आठ जनवरी को राष्ट्रीय ग्रामीण बंद का भी ऐलान किया गया।

देशभर के 25 राज्यों के किसान प्रतिनिधियों ने मावलंकर हाल में दो दिन तक किसान और पर्यावरण, संपूर्ण कर्ज माफी, न्यूनतम समर्थन मूल्य, भूमि अधिग्रहण कानून-2013, मुक्त व्यापार समझौते, वन अधिकार कानून, लावारिस पशु, कृषि मजदूरों के लिए कानून और कश्मीर में कृषि संकट सरीखे मसलों पर चर्चा की। 
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इसके बाद साझा संघर्ष विकसित करने के लिए मसौदा तैयार किया गया। इसके बारे में आम लोगों को जागरूक करने की जिम्मेदारी हर संगठन को अपने-अपने प्रभावी क्षेत्र में उठानी है।

एआईकेएससीसी के संयोजक वीएम सिंह ने बताया कि पराली के धुएं के नाम पर आज किसानों को तंग किया जा रहा है। गन्ने की पत्ती तक जलाने पर एफआईआर हो रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण की प्रकृति शहरी है। पराली के धुएं का इसमें रोल नहीं है। 

अगर सरकारें मानती है कि पराली का धुआं प्रदूषण कर रहा है तो उनको इसका व्यावहारिक समाधान देना चाहिए, क्यों वह पराली को खरीदने के साथ उससे बायोगैस, पेपर, सीएनजी और एथेनॉल सरीखे बाई-प्रोडक्ट नहीं बनातीं।

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8 जनवरी को राष्ट्रीय ग्रामीण बंद

समन्वय समिति से जुड़े योगेंद्र यादव ने बताया कि कृषि की बर्बादी बदस्तूर जारी है। खरीफ की मौजूदा फसल में किसानों पर दोहरी मार पड़ी है। पहले सूखे ने और बाद में बारिश ने फसलों को तबाह किया है। देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की पूरी तरह बर्बादी हो रही है। दो दिन तक खेती-किसानी से जुड़ बहुत सारे मसलों पर संजीदा चर्चा हुई। इसके आधार पर साझा संकल्प तैयार किया गया है।

योगेंद्र यादव के मुताबिक, 25 राज्यों के 250 किसानों ने आठ जनवरी को राष्ट्रीय ग्रामीण बंद करने का आह्वान किया है। इस दिन पूरा ग्रामीण भारत बंद रहेगा। एआईकेएससीसी की जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर की इकाइयां अपनी-अपनी योजना के अनुसार इसे आगे बढ़ाएंगी। इसके लिए केंद्रीय नेतृत्व की तरफ से सिर्फ इतनी भर सलाह है कि अहिंसात्मक प्रदर्शन व्यक्तियों व दलों के खिलाफ नहीं, सरकारों के खिलाफ होगा।

जागरूकता अभियान चलेगा
दूसरी तरफ वीएम सिंह का कहना है कि इससे पहले 15-31 दिसंबर तक सभी संगठन अपने-अपने प्रभाव क्षेत्र वाले इलाके में किसानों के बीच जागरूकता अभियान चलाएंगे। इस दौरान सम्मेलन में उठाए गए मसलों की जानकारी किसानों को दी जाएगी। इसके बाद एक जनवरी से पांच जनवरी के बीच किसान राष्ट्रपति के नाम पत्र लिखेंगे। आखिर में आठ जनवरी को ग्रामीण भारत बंद रहेगा। किसान अपने गांव में रहेगा। वह किसी भी तरह का कोई काम नहीं करेगा।
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