बाद में गांधी ने भी कहा कि दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी (डीपीसीसी) आगामी लोकसभा चुनाव में ऐसे गठबंधन के खिलाफ है। गोयल ने कहा कि आप ने मान लिया है कि आगामी चुनाव में कांग्रेस उससे आगे है और इसी कारण से पार्टी अध्यक्ष केजरीवाल उससे गठबंधन के वास्ते ‘‘विनती’’ कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ‘‘उनके (केजरीवाल) पास चुनाव में अकेले जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है क्योंकि कांग्रेस ने उनकी पार्टी के साथ गठबंधन करने से इनकार कर दिया है।’’
गोयल ने कहा, ‘‘कांग्रेस का आप के साथ गठबंधन से इंकार करना भाजपा से मुकाबले के लिए उसका विश्वास दिखाता है। लेकिन दिल्ली में सत्तारुढ़ आप में वह आत्मविश्वास भी नहीं है।" गोयल 2013 में दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष रहे थे। वह राज्यसभा में भेजे जाने से पहले दिल्ली सदर (1996) और चांदनी चौक (1998 और 1999) से भाजपा सांसद रह चुके हैं। वह फिलहाल नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री हैं।
केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि ‘आप’ 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में अपनी भारी जीत के बाद लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने में "विफल" रही है। ‘आप’ के नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘आप ने 2017 में नगर निगम चुनाव में अपनी हार से कोई सबक नहीं लिया। लोगों ने लोकसभा चुनाव में पार्टी के खिलाफ मतदान करने का मन बना लिया है क्योंकि वह उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरी है।’’
राष्ट्रीय राजधानी में लोकसभा की सभी सात सीटें भाजपा के पास हैं। लोकसभा चुनावों के लिए आप और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन अगर यह हो जाता है तो भाजपा को 2014 में मिली सीटों को बनाए रखने में कठिन चुनौती का सामना करना पड़ेगा।