हाईकोर्ट ने सभी सरकारी अस्पतालों को दिल्ली हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों के शवों के पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी कराने और डीएनए जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार पर 11 मार्च तक रोक लगा दी है।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और आई एस मेहता की पीठ ने अंसारी मोहम्मद आरिफ नामक शख्स की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए शुक्रवार को संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी शवों के डीएएन सैंपल जुटाएं और जिन शवों के डीएनए टेस्ट नहीं हुए हैं, उनके डीएनए टेस्ट करवाए जाएं।
अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार के संबंध में पीठ अगली सुनवाई पर फैसला सुनाएगी। याचिका के माध्यम से आरिफ ने कहा कि 26 फरवरी से उसके 25 वर्षीय जीजा हमजा लापता है और अब तक उनका कोई सुराग नहीं मिला है। याची ने मांग की है कि उनके जीजा के बारे में जानकारी चाहिए कि वह कहां हैं और उनके साथ क्या हुआ?
वहीं, पुलिस ने अदालत ने बताया कि भागीरथी विहार गोकलपुरी नाले से हमजा नामक शख्स का शव 2 मार्च को बरामद किया गया था। पुलिस ने कहा कि उसका पोस्टमार्टम राम मनोहर लोहिया अस्पताल में करवाया जाएगा। पुलिस ने कहा कि इस मामले में अज्ञात के खिलाफ अपहरण, दंगा, हत्या और सबूतों को नष्ट करने की धाराओं के तहत एफआईआर भी दर्ज की है।
सरकारी वकील राहुल मेहरा और चैतन्य गोसैन ने सूचित किया कि पोस्टमार्टम के बाद शवों के अंतिम संस्कार के लिए उनके परिजनों को सौंप दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने पीठ को बताया बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के तहत जिन शवों की पहचान नहीं हो सकी है, उनकी जानकारी दिल्ली पुलिस की वेबसाइट पर फोटो के साथ अपलोड कर दी गई है।