दिल्ली में जश्न मनाते भाजपा समर्थक
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दिल्ली के दिल में क्या है? अभी 24 घंटे पहले तक, राज्य की सियासत में दिलचस्पी रखने वाले लोग जब एक दूसरे से यह पूछ रहे थे तो किसी को भी गुमान भी नहीं था कि दिल्ली के दिल में बीजेपी इस कदर बसी हुई है। राज्य की सातों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी की एकतरफा जीत ने साबित कर दिया है कि बाकी दलों के लिए दिल्ली अभी कोसों दूर है।
चांदनी चौक ही एकमात्र ऐसी सीट रही जहां कांग्रेस प्रत्याशी जेपी अग्रवाल भाजपा के प्रवीण खंडेलवाल को कुछ हद तक टक्कर देते दिखाई दिए। लेकिन, अंततः नतीजे भाजपा के पक्ष में ही गए। माना जा रहा था कि अरविंद केजरीवाल के जेल से बाहर आने से आम आदमी पार्टी और उनके प्रत्याशियों को मदद मिलेगी। उनके रोड शो में जिस तरह लोगों ने आगे बढ़कर हिस्सा लिया उससे भी इस धारणा को बल मिला।
लेकिन, दिल्ली के लोगों ने राज्य में आप और केंद्र में भाजपा के दस्तूर को कायम रखा। सात में से छह प्रत्याशियों को बदलना भी एक तरह से भापपा के पक्ष में ही गया। विपक्ष ने ज्यादातर पुराने चेहरों को आजमा कर लोगों को निराश किया। स्वाति मालीवाल प्रकरण ने आम आदमी पार्टी की छवि को खासा नुकसान पहुंचाया। खासतौर पर महिला मतदाताओं में इससे गलत संदेश गया।