औरंगजेब रोड का नाम बदलकर एपीजे अब्दुल कलाम मार्ग कर दिए जाने पर रविवार को केंद्रिय मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि उन्हें औरंगजेब रोड पर रहने में शर्म महसूस होती थी। अब वो खुश हैं कि वो एपीजे अब्दुल कलाम मार्ग पर रह रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि इस रोड का नाम बदलने का सुझाव विहिप या बजरंग दल से नहीं बल्कि पाकिस्तान में जन्मे मुस्लिम पत्रकार ने दिया था।
नायडू ने इस बात के साथ ये भी जोड़ा कि अब उन्हें अपना पता बताने में कोई शर्म महसूस नहीं होती। उन्हें खुशी है कि दिल्ली के एक रोड का नाम देश के महान सपूत और सबके प्रेरणस्रोत डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर रखा गया है।
2013 में ही दिया था प्रस्ताव
केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने रविवार को लेखक उदयवीर आर्य की पुस्तक 'द क्रोनोलॉजी ऑफ एंसिएंट इंडिया- विक्टिम ऑफ कॉन्कॉक्शन एंड डिस्टॉर्शन्स' के अनावरण के वक्त अपनी बातें साझा करते हुए कहा कि, जब औरंगजेब रोड का नाम बदलने का प्रस्ताव रखा गया था तब इतनी आलोचना हुई जैसे किसी विदेशी के नाम पर रोड का नाम रखा जा रहा हो।
उन्होंने आगे कहा कि लेकिन सभी को आश्चर्य होगा कि दिल्ली के औरंगजेब रोड का नाम कलाम के नाम पर रखने का सुझाव पाकिस्तान में जन्मे मुस्लिम पत्रकार तारिक फतेह ने दिया था। अब वो कनाडा में रह रहे हैं।
नायडू ने बताया कि जब तारिक 2013 में भारत आया तो उसे ये देखकर काफी धक्का पहुंचा कि राजधानी की एक मुख्य सड़क का नाम औरंगजेब के नाम पर है। ये तारिक ही था जिसने भारतीय हिंदुओं को इस रोड का नाम बदलने की जरूरत के बारे में कहा।
अब खुश हैं नायडू क्योंकि उनका पता है कलाम रोड
वेंकैया नायडू ने ये भी बताया कि वो खुद अपना पता किसी को बताते हुए शर्म महसूस करते थे। उन्होंने ये बताया कि उन्हें ये कहना पड़ता था कि वो 30 औरंगजेब रोड पर रहते हैं।
नायडू आगे बोले कि लेकिन अब वो काफी खुश हैं क्योंकि अब वो 30 अब्दुल कलाम रोड पर रहते हैं।
बता दें कि 28 अगस्त को नई दिल्ली नगरमहापालिका ने औरंगजेब रोड का नाम बदलकर एपीजे अब्दुल कलाम रोड कर दिया है।