अब बेकार प्लास्टिक पर्यावरण के लिए खतरा नहीं बनेगा। आईआईटी दिल्ली की रिसर्च टीम को बेकार प्लास्टिक से डीजल तैयार करने में पहली सफलता मिली है। एक किलो वेस्ट से फिलहाल 750 एमएल डीजल तैयार किया गया है। मेक इन इंडिया थीम के तहत इस शोध के लिए आईआईटी दिल्ली और डीआरडीओ प्रोजेक्ट को पैसा मुहैया करवा रहे हैं।
आईआईटी दिल्ली के तीसरे इंडस्ट्री डे पर ग्रीन एनर्जी थीम के तहत रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग ने वेस्ट प्लास्टिक से डीजल बनाने के शोध को प्रस्तुत किया। लाइव डेमो में बेकार प्लास्टिक से डीजल बनाकर भी दर्शाया गया।
रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग के प्रमुख डॉ. केके पंत और सेंटर फॉर रूरल डेवलेपमेंट एंड टेक्नोलॉजी के प्रमुख प्रो. एसएन नायक की अध्यक्षता में पीएचडी रिसर्च स्कॉलर उमा द्विवेदी ने इस तकनीक को ईजाद किया गया है। प्रो. पंत के मुताबिक, पिछले एक साल से इस रिसर्च पर काम हो रहा था। लैब में बेकार प्लास्टिक से डीजल बनाने में पहली सफलता मिल गई है।
90 फीसदी शोध कार्य पूरा
पीएचडी रिसर्च स्कॉलर उमा द्विवेदी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक की बात दोहरा चुके हैं। इसलिए हमें प्लास्टिक के प्रयोग पर खुद ही रोक लगानी होगी। बेकार प्लास्टिक से पर्यावरण को नुकसान से बचाने के उद्देश्य से इस शोध पर काम शुरू किया और पहली सफलता मिल गई।
उमा के मुताबिक, वे एक किलो बेकार प्लास्टिक से करीब 750 एमएल डीजल बना सकती है। शोध का 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है। इस मशीन से कैटलिस्ट नामक केमिकल मिलाकर डीजल तैयार किया जाता है।
एक लीटर डीजल तैयार करने में अभी करीब लगभग 45 रुपये का खर्चा आ रहा है। फिलहाल उसके प्रयोग से जो डीजल तैयार किया जा रहा है उसकी शुद्धता 70 फीसदी है। बाजार में उपलब्ध डीजल जैसी गुणवत्ता लाने के लिए उसे करीब एक साल का समय लग सकता है।