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उत्तराखंड में गहराया सियासी संकट, बागी विधायकों ने गुड़गांव में डाला डेरा

Sat, 19 Mar 2016 07:59 PM IST
ओम प्रकाश/अमर उजाला, गुड़गांव
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Uttrakhand MLA - फोटो : अमर उजाला
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उत्तराखंड में गहराए सियासी संकट का एक बड़ा केंद्र गुरु द्रोणाचार्य का शहर गुडग़ांव भी बन गया। यहां के फाइव स्टार होटल लीला से कांग्रेस के बागी विधायकों ने अपने आलाकमान और मुख्यमंत्री हरीश रावत पर तीखे तीर चलाए और भगवा ब्रिगेड के साथ नई सरकार बनाने की 'लीला' रची।
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दिल्ली-गुडग़ांव बॉर्डर स्थित इस होटल में कांग्रेस के 9 बागी विधायकों के साथ-साथ भाजपा के 26 विधायक भी थे। कांग्रेस विधायक खुलकर सामने आए, सीएम और कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ भड़ास निकाली तो भाजपा विधायक अंदर बैठकर रणनीति बनाने में जुटे रहे।

जोड़तोड़ के गणित में उलझे रहे कि किस तरह से नई सरकार बनेगी। गुडग़ांव में विधायकों को इसलिए ठहराया गया था ताकि मुख्यमंत्री हरीश रावत को पता न चल सके।
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बागी विधायकों को फिर मनाया न जा सके। लेकिन यह भेद खुल गया। विधायकों ने कहा उन्हें प्रलोभन दिए जा रहे हैं लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है।

कांग्रेस के जो बागी यहां ठहरे हैं उनमें सितारगंज के विधायक विजय बहुगुणा, केदारनाथ की विधायक शैला रानी रावत, रुद्रप्रयाग के हरक सिंह रावत, नरेंद्र नगर के सुबोध उनियाल, रायपुर के उमेश शर्मा, खानपुर के कंवर प्रणव सिंह, जसपुर के शैलेंद्र मोहन सिंहल, राम नगर की अमृता रावत और रुड़की के विधायक प्रदीप बत्रा शामिल हैं।

नहीं बनी बात तो राष्ट्रपति भवन में करेंगे परेड

Uttrakhand MLA - फोटो : अमर उजाला
सबने एक सुर से कहा कि उनका पहला लक्ष्य हरीश रावत सरकार को बर्खास्त करवाना है। 35 विधायकों ने राज्यपाल को लिखित में दे दिया है। वहां से बात नहीं बनेगी तो राष्ट्रपति भवन में परेड करेंगे। इससे पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मिलेंगे।

उत्तराखंड सरकार में 10 विभागों के मंत्री हरक सिंह रावत ने भी मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के यहां मंत्रियों और विधायकों तक की कोई नहीं सुनता।

हरक सिंह और सुबोध उनियाल ने कहा कि उनके नेता पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा हैं। कांग्रेस आलाकमान भी उनसे संपर्क कर रहा है लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है। वह लोग काफी दिन से सरकार की शिकायत कर रहे थे लेकिन अब तक किसी ने ध्यान नहीं दिया।

अब इमोशनल हथियार के तौर पर विजय बहुगुणा की बहन रीता बहुगुणा जोशी को बागियों की मान-मनव्वल के लिए भेजा जा रहा है। लेकिन विधायकों ने तय किया है कि निजी रिश्तों से बड़ा उनका जनता के साथ रिश्ता है। इसलिए वह किसी बहकावे में नहीं आने वाले हैं।

उनियाल और कंवर प्रणव सिंह का कहना है कि सीएम कार्यालय खनन, शराब माफियाओं और दलालों का अड्डा बन गया था। सीएम किसी की सुन नहीं रहे थे इसलिए सरकार को अल्पमत में लाने के लिए विधायक मजबूर हो गए।
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नहीं चाहते हैं राष्ट्रपति शासन

Uttrakhand MLA - फोटो : अमर उजाला
-बागियों में से कोई भी विधायक नहीं चाहता कि उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगे। बागियों का कहना है कि अभी चुनाव में समय है। भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाएंगे। 
-बागी विधायक यह एलान कर रहे हैं कि उनके नेता विजय बहुगुणा हैं लेकिन यह नहीं बता रहे हैं कि भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री की दावेदारी कौन करेगा। 
-विधानसभा अध्यक्ष द्वारा बागी विधायकों की सदस्यता खत्म करने और नोटिस के सवाल पर बागियों ने कहा शुक्रवार को अविश्वास प्रस्ताव विधानसजभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के खिलाफ भी था। सरकार अल्पमत में है। उनका कहना है कि जब सरकार और स्पीकर ही नहीं रहेंगे तो सदस्यता कौन छीनेगा।
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