खोड़ा कॉलोनी में एक जिम संचालक अशोक यादव ने बताया कि चार पुलिस चौकी वाले इस एरिया को पूरी तरह सील कर दिया गया है। दूध-सब्जी को छोड़कर किसी भी अन्य वाहन को आने-जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। दिल्ली और नोएडा की तरफ निकलने वाली सभी सड़कों पर पुलिस प्रशासन ने कड़ा पहरा लगा दिया है।
खोड़ा गांव के एक वकील के यहां सबसे पहले कोरोना का मामला सामने आया था। वकील के यहां किराए पर रहने वाले एक बुजुर्ग व्यक्ति को सांसों की बीमारी थी। चेक करने के बाद वे कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे जिनकी बाद में मौत हो गई।
एक स्थानीय ब्रजेश शर्मा ने बताया कि कोरोना का मामला सामने आने के बाद यहां लोग काफी सतर्क हो गए हैं। पुलिस ने बाहर से पाबंदी लगाई है, लेकिन अंदर के एरिया में रहने वाले लोगों ने अपनी-अपनी गलियों को बांस के डंडों से बांधकर सील कर दिया है। किसी भी बाहरी को आने-जाने नहीं दिया जा रहा है। अंदर की कई गलियों में दूध के अलावा किसी दूसरी चीज की सप्लाई नहीं हो रही है।
कोरोना के कारण हुई कामबंदी के बाद यहां के गरीब श्रमिक वर्ग के लोगों पर भुखमरी जैसी स्थिति आ गई थी। इसी बीच समाज के कई वर्ग के लोग सामने आए और लोगों में भोजन और सूखा राशन वितरित करना शुरू कर दिया था।
पुलिस प्रशासन की तरफ से भी इसमें काफी सहयोग मिल रहा है। जयगुरुदेव संस्था के लोगों ने यहां पर भारी संख्या में लोगों को तैयार भोजन करवाया। हालांकि कोरोना का मामला सामने आने के बाद तैयार भोजन दिए जाने पर रोक लगा दी गई है। अब यहां केवल सूखा राशन गरीबों को दिया जा रहा है।
गाजियाबाद जिले में आने वाले खोड़ा की अनुमानित जनसंख्या लगभग 12 लाख है जो इसके 10 वर्ग किलोमीटर की एरिया में रहती है। यहां ज्यादातर उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से आए मजदूर वर्ग के लोग रहते हैं।
यहां आबादी का घनत्व बहुत ज्यादा है। छोटे-छोटे कमरों में पांच से छह लोग रहते हैं। यहां रहने वाले ज्यादातर लोग दिल्ली के विभिन्न इलाकों में निर्माण श्रमिक, बिजली मैकेनिक, प्लंबर, रसोई गैस पहुंचाने और लोगों के घरों में घरेलू नौकर के रुप में काम करने वाले लोग रहते हैं।