हरियाणा सरकार की ओर से अरावली के प्राइवेट लैंड को वन क्षेत्र न मानने के विरोध में युवा एकजुट हो रहे हैं। उन्होंने आंदोलन की तैयारी कर ली है।
इसके तहत रविवार को गांव मांगर में यात्रा निकाली जाएगी और लोगाें को जागरूक कर उनसे वन क्षेत्र को संरक्षित रखने के उपाय पूछे जाएंगे।
अरावली की हरियाली को बचाए रखने के लिए शहर और इस क्षेत्र के गांवों के युवा तीन साल से संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने फेसबुक पर सेव अरावली नाम से पेज बनाया है।
इसमें अब तक दिल्ली-एनसीआर के 2200 से ज्यादा युवा जुड़ चुके थे। इस पेज पर सरकार के आदेश और नई योजनाओं के साथ ही अरावली के बारे में भी जानकारी अपडेट की जा रही है।
पेज से जुड़े सदस्य रोजाना अरावली के बारे में अपने विचार रखते हैं और उस पर पहले से ज्यादा हरियाली लाने के लिए लोगों को जागरूक करते हैं।
सेव अरावली के संस्थापक सदस्य जितेंद्र भड़ाना ने बताया कि तीन साल पहले वह अरावली की पहाड़ियाें में अकेले घूमे थे और तभी से वहां की हरियाली को बचाने की मुहिम शुरू कर दी।
इसके बाद धीरे -धीरे लोग जुड़ने लगे और आज 2200 से ज्यादा लोग उनके साथ हैं। इसमें जुड़ने वाले 80 प्रतिशत युवा मल्टी नेशनल कंपनियों (एमएनसी) में काम करते हैं।
कुछ वकील भी है, जो सरकार की ओर से अरावली की हरियाली को खत्म करने के लिए प्रोजेक्ट की घोषणा पर नजर रखते हैं और उन पर रोक लगाने में उनका साथ देते हैं। उनके सदस्य वाट्सअप से भी जुडे़ हैं।
इससे पहले सरकार ने अरावली में वेस्ट प्लांट लगाने की घोषणा की थी। इसे लेकर सभी सदस्यों ने मुहिम चलाई। यात्रा और नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर लोगों को जागरूक किया गया।
इसके बाद प्लांट नहीं लगा। इसके बाद भाजपा सरकार ने अरावली की पहाड़ियाें में बनी प्राकृतिक झीलों मेें से पानी भर बड़खल झील भरने की योजना मनाई। इसका भी विरोध किया गया।
इसके बाद सरकार की योजना सिरे नहीं चढ़ सकी। अब तक उन्होंने छह यात्राएं निकाली हैं, जिसमें ग्रामीणों का पूरा सहयोग मिला।
बता दें कि पर्यावरण के बढ़ते खतरे पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने भी चिंता जाहिर करते हुए दिल्ली-एनसीआर के क्षेत्र में प्रदूषण रोकने के लिए आदेश जारी किए थे, लेकिन सरकार ने निजी बिल्डराें के आगे हाथ खड़े कर दिए।