अदालत ने विभिन्न बोर्डों की रिपोर्ट में अंतर को कारण बताया
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के एक उम्मीदवार को तीसरी मेडिकल परीक्षा देने की अनुमति दे दी है। अदालत ने विभिन्न बोर्डों की रिपोर्ट में अंतर को कारण बताकर यह फैसला सुनाया है। रिपोर्ट में श्रवण (सुनने की क्षमता) दिव्यांगता का दावा विभिन्न मेडिकल बोर्डों में अलग-अलग पाया गया था। उम्मीदवार ने कहा कि उसकी श्रवण दिव्यांगता 40 फीसदी से अधिक है, लेकिन पहली मेडिकल जांच में उसे केवल 1 फीसदी श्रवण दिव्यांगता से ग्रस्त पाया गया। इसके बाद अपीलीय चिकित्सा बोर्ड ने उसे 67.84 फीसदी श्रवण दिव्यांगता वाला बताया।
न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने कहा कि पहली और अपीलीय बोर्ड की रिपोर्ट में इतना बड़ा अंतर है कि याचिकाकर्ता को एक और चिकित्सा जांच देने का निर्देश देना उचित है। अदालत ने कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग बनाम कोरे निहाल प्रमोद (2025) मामले का हवाला दिया, जहां सर्वोच्च न्यायालय ने भी ऐसे ही मामलों में तीसरी मेडिकल परीक्षा की अनुमति दी थी।