नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अमित महाजन ने उपहार अग्निकांड से जुड़े सुशील और गोपाल अंसल के खिलाफ सबूतों से छेड़छाड़ के मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। यह फैसला 30 अक्तूबर को लिया गया, जब पता चला कि जस्टिस महाजन पहले अंसल हाउसिंग एंड कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के लिए वकील के रूप में काम कर चुके हैं।
उपहार त्रासदी पीड़ित संगठन की संयोजक नीलम कृष्णमूर्ति ने निष्पक्ष सुनवाई को लेकर आशंका जताई और मामले को दूसरी बेंच के समक्ष सूचीबद्ध करने की मांग की। न्यायमूर्ति महाजन ने कहा कि यद्यपि आपत्ति आधारहीन है, लेकिन न्याय के हित में और शिकायतकर्ता की आशंकाओं को दूर करने के लिए, मामला छह नवंबर 2025 को दूसरी बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए।
हाईकोर्ट उस अपील की सुनवाई कर रहा है, जिसमें ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें अंसल बंधुओं की सजा को सात साल से घटाकर आठ महीने कर दिया गया था। दिल्ली पुलिस ने जुलाई 2022 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें जिला जज ने अंसल बंधुओं को रिहा किया था।
नवंबर 2021 में पटियाला हाउस के मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने अंसल बंधुओं को सात साल की सजा और जुर्माना सुनाया था। सत्र न्यायाधीश ने इस सजा को कठोर और उनकी उम्र के लिए असंगत बताया। उपहार त्रासदी 13 जून 1997 को फिल्म ''''बॉर्डर'''' की स्क्रीनिंग के दौरान हुए अग्निकांड से संबंधित है, जिसमें 59 लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए थे। ब्यूरो