मेवात के रास्ते आरएसएस उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में मुस्लिम वोटरों में सेंध लगाने की तैयारी में है। खासकर उत्तर प्रदेश की सीमा से लगते दर्जनों गांवों में संघ के कार्यकर्ताओं की गतिविधियां बढ़ी हैं।
इस सिलसिले में कई मेवाती जत्थे उत्तर प्रदेश के मेवातियों को भाजपा के पाले में लाने की कोशिश में लगे हैं। देशभर में करीब चार करोड़ मेवाती अलग-अलग राज्यों के 70 जिलों में बसे हुए हैं।
उत्तर प्रदेश के आगरा, मथुरा, कोसी, जेवर, मेरठ, नोएडा सहित कई जिलों और कस्बों में मेव समुदाय अच्छी तादाद में है। शायद इसलिए मेवात की धरती को आरएसएस अपने लिए मुफीद मानकर चल रही है।
हाल ही में वैचारिक विरोधाभास के बीच स्वयंसेवक संघ की पैठ दिल्ली के नजदीक बसे मेवात में बढ़ी है। कुछ लोगों को अभी उसकी कार्यशैली के प्रति अविश्वास है तो कुछ के लिए आरएसएस अछूत नहीं रहा।
शायद लोगों को यकीन है कि क्षेत्र के पिछड़ेपन को संघ के तालमेल से ही दूर किया जा सकता है। बीते चार वर्षों में मेवात क्षेत्र में आधा दर्जन आयोजनों के सहारे तीज-त्योहार, मुस्लिम गोपालन, आतंकवाद और राष्ट्रवाद समेत मुस्लिम प्रोग्रेसिव पंचायत करके छाप छोड़ी है। मेवातियों के सकारात्मक सहयोग से जल्दी ही मुस्लिम चौपालों का आयोजन होने की संभावना बन रही है।
कुछ लोग मेवात में आरएसएस की गतिविधियों को उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों से भी जोड़कर देख रहे हैं। मेवात की सियासी राजधानी मानें जाने वाले बड़कली चौक के आसपास संघ की ज्यादा गतिविधियां देखी जा रही हैं।
ईद-मिलन समारोह के जरिये हिंदू-मुस्लिम भाईचारे को बढ़ाने के लिए 13 अगस्त, 2014 को नगीना में आयोजन हुआ। 15 सितंबर, 2015 को फिरोजपुर में 13 राज्यों के मुस्लिम गोपालको का सम्मेलन किया गया।
वहीं 28 सितंबर, 2016 को बिछौर गांव में मुस्लिम प्रगतिशील पंचायत सम्मेलन की शरुआत हुई। 14 अक्टूबर, 2016 को पूर्व राष्ट्रपति ड़ॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती संध्या पर मुस्लिम छात्रों के साथ आतंकवाद व राष्ट्रवाद पर सम्मेलन किया गया। मेवात में संघ के वयोवृद्ध नेता डॉ. बशीर अहमद मेवाती बताते हैं कि नई पीढ़ी संघ के साथ मिलकर नई शुरूआत कर रही है, जिससे तरक्की की उम्मीद जगी है।