आम आदमी पार्टी (आप) ने अपने सांसद संजय सिंह की आवाज दबाने का आरोप उत्तर प्रदेश सरकार पर लगाया है। पार्टी के मुताबिक, यूपी पुलिस ने बिना वजह के सीतापुर के गेस्ट हाउस में आप सांसद को घंटों हिरासत में रखा है। यह वाकया उस वक्त हुआ, जब वह लखीमपुर खीरी से मृत विधायक निरवेंद्र मिश्र के परिवार वालों से मिलकर लौट रहे थे। तीन बार विधायक रहे मिश्र की बीते दिनों जमीन विवाद में पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी। आप ने एक बार फिर यूपी सरकार पर प्रदेश के ब्राह्मणों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।
दिल्ली से आप विधायक सौरभ भारद्वाज ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि आप सांसद संजय सिंह को यूपी पुलिस ने बिना वारंट के सीतापुर के अटरिया गेस्ट हाउस में तीन घंटे तक हिरासत में रखा। वह लखीमपुर खीरी से लौट रहे थे। वहां उन्होंने जमीन विवाद में पीट-पीट कर मार डाले गए विधायक निरवेंद्र मिश्रा (73) के परिजनों से मुलाकात की थी।
सौरभ भारद्वाज के मुताबिक, चूंकि संजय सिंह ठाकुर समाज से हैं और इसके बावजूद वो लगातार आवाज उठा रहे हैं कि योगी जी सरकार में ठाकुर समाज को छोड़कर, बाकी समाजों के साथ अत्याचार और पक्षपात किया जा रहा है। इसी वजह से उनको दबाया जा रहा है। आप विधायक का आरोप है कि आज उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण होना सबसे बड़ा अपराध हो गया है। हर दूसरे दिन मरने वाला आदमी मिश्रा है, दूबे है, पांडेय है, शर्मा है, वाजपेयी है। यह तब से हो रहा है, जब से योगी आदित्यनाथ यूपी के मुख्यमंत्री बने हैं। प्रदेश में इस बात की चर्चा आम है कि सारे प्रशासन पर एक खास समाज का जमावड़ा है।
विधायक की हत्या करने वाले आरोपियों को छुड़ा रहे पुलिस अधिकारी
सौरभ भारद्वाज यही नहीं रूके। उनका आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में विधायक को पीटकर मारा गया। इसके बाद जब अपराधियों का स्थानीय निवासियों ने पकड़ लिया तो स्थानीय सीओ खुद अपराधियों को छुड़ाकर ले गए। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि उत्तर प्रदेश में लोगों को इतना डराया गया है कि कोई आवाज उठाने के लिए तैयार नहीं। वहीं, आप सांसद की जुबान को बंद करने के लिए उनके ऊपर अलग-अलग खानों में अब तक 13 जगहों पर मुकदमें दर्ज कराए गए हैं।
इसी कड़ी में रविवार को उनको सीतापुर के अटारी गेस्ट हाउस में 3 घंटे तक डिटेन किया। सिर्फ इसलिए कि यह दबाव बनाया जा सके कि संजय सिंह ब्राह्मणों और दलितों की आवाज उठाना बंद करें। सौरभ भारद्वाज ने चेतावनी दी कि आप इस तरह की धमकियों डरने वाली नहीं है। पार्टी नेतृत्व शोषितों के हक में आवाज आगे भी उठाता रहेगा।