जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से भी बड़ी चुनौती जन्म ले रही है। धरती के स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर की वादियों में गर्मी बढ़ रही है और ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इसका खामियाजा किसानों को भोगना पड़ रहा है। दुनिया में सबसे अधिक करीब 6 हजार से अधिक ग्लेशियर इसी हिस्से में हैं।
चेरी, बादाम और सैफरॉन की खेती करने वाले किसान असमय बारिश, बर्फबारी के चलते धीरे-धीरे बर्बाद हो रहे हैं। कश्मीर में पर्यटन का दबाव और वादियों में बढ़ती हलचल ने कश्मीर की जलवायु को अस्थिर कर दिया है। यह तथ्य ‘जलालुद्दीन बाबा की डॉक्यूमेंट्री ग्लोबल वार्मिंग : कश्मीर चैप्टर’ का हिस्सा हैं। टॉक्सिक लिंक में पर्यावरणीय फिल्मों की प्रदर्शनी में उनकी फिल्म भी दिखाई गई।
फिल्म निर्माता जलालुद्दीन बाबा ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि वाटलर में पाकिस्तान से पीढ़ियों पहले आकर बसे समाद खान ने चेरी की खेती शुरू की थी। हालांकि, जब उनके चेरी के पेड़ फल देने लायक हुए तो असमय बर्फबारी ने उन्हें तबाह कर दिया।