गाजियाबाद में साहिबाबाद के शेल्टर होम से भागे 23 बच्चों में से पांच को ऑपरेशन स्माइल टीम ने दिल्ली से बरामद कर लिया है। पुलिस को बच्चे मजदूरी करते मिले।
इनमें से 14 और 15 साल के दो बच्चों का आरोप है कि शेल्टर होम में रहने वाला 16 वर्षीय किशोर उनके साथ कुकर्म करता था, इसलिए वे भाग गए थे। जबकि तीन बच्चों का कहना है कि उन्हें अच्छा खाना नहीं मिलता था, न ही अच्छे से रखा जाता था।
उन्हें दुत्कारा जाता था और उन्हें परेशान किया जाता था, इस वजह से उन्हें भागना ही ठीक लगा। एसएसपी ने आरोपों की जांच के निर्देश दिए हैं। फिलहाल बच्चे विजयनगर थाने में हैं, जिन्हें किसी दूसरे शेल्टर होम में भेजने की तैयारी है।
खिड़की काटकर भागे बच्चे
एसओ विजयनगर अवधेश यादव ने बताया कि बरामद बच्चों में सुहैब (15) निवासी सलीमपुर, दीपक (14) और रंजीत (10) बिहार का है। कुकर्म का आरोप लगाने वाले बच्चों में एक लखनऊ का है और दूसरा राजीव कालोनी साहिबाबाद का है।
'ऑपरेशन स्माइल' के नोडल अफसर सीओ रणविजय सिंह ने बताया कि बच्चों के भागने की मजिस्ट्रेटी जांच होगी, इसके बाद ही तय होगा कि शेल्टर होम संचालक पर रिपोर्ट लिखाई जाए या नहीं।
बता दें कि बाल मजदूरी और अन्य काम करने वाले बच्चों को माता-पिता से मिलवाने के लिए गाजियाबाद में शुरू किए गए ‘ऑपरेशन स्माइल’ के तहत बरामद किए गए 23 बच्चे साहिबाबाद के शहीद नगर स्थित आशादीप फाउंडेशन के शेल्टर होम से भाग गए हैं। ये बच्चे 11 से 27 अक्तूबर के बीच शेल्टर होम की खिड़की काटकर भागे थे।
बच्चे गायब 23, गुमशुदगी सिर्फ 12 की
शहीद नगर स्थित आशादीप फाउंडेशन के शेल्टर होम से भाग 23 बच्चों के मामले में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। पता चला है कि इनमें से पुलिस ने सिर्फ 12 बच्चों की ही गुमशुदगी दर्ज थी। शेल्टर होम संचालकों की ओर से सूचना देने के बावजूद पुलिस ने लापरवाही की।
शेल्टर होम के डायरेक्टर एचके चेट्टी ने बताया कि उन्होंने पहली शिकायत 11 अक्टूबर को दी थी। 17 अक्टूबर को चार बच्चों और 22 अक्टूबर को आठ बच्चों की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। एसएचओ साहिबाबाद के मुताबिक अभी बाकी बच्चों की फोटो बनवाई जा रही हैं, जिस कारण गुमशुदगी में दर्ज करने में देरी हुई।
सीओ रणविजय सिंह ने बताया कि पुलिस टीम ने पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन, कोड़िया पुल, जीबी रोड, चांदनी चौक, शीश गंज गुरुद्वारा और आसपास के इलाकों में बच्चों की तलाश की है। भागने वाले ज्यादातर बच्चे नशे के आदी बताए जा रहे हैं। जिसके कारण वे खिड़की तोड़कर भागे हैं।