नई दिल्ली।
पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा बढ़ाने की मांग वाली याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत मामले में यह याचिका दाखिल की गई थी। न्यायमूर्ति नवीन चावला व न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की पीठ ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने मामले के प्रति सतर्क नहीं है, तो वह पर्याप्त राहत की मांग नहीं कर सकता। पीठ ने पाया कि पीड़िता की तरफ से जान-बूझकर कोई कार्रवाई नहीं की गई और लापरवाही बरती गई। कोर्ट ने कहा कि उसे 2020 में आए फैसले के बारे में पता था और वह इस घटना से जुड़े अन्य मामलों में भी सक्रिय रूप से हिस्सा ले रही थी। कोर्ट ने कहा कि उसकी देर से दायर की गई अर्जी को मंजूर करने से, भविष्य में भी लोग देर से दावे करने लगेंगे।
अदालत ने पाया कि इस फैसले के खिलाफ अपील करने की समय-सीमा मई 2022 में ही खत्म हो गई थी। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि अपील दायर करने की निर्धारित समय-सीमा खत्म होने के 1,199 दिनों बाद अर्जी दायर की गई थी। तीस हजारी की विशेष अदालत ने मार्च 2020 में मामले में कुलदीप सिंह सेंगर, उसके भाई जयदीप सिंह सेंगर सहित अन्य को दोषी ठहराया था। ट्रायल कोर्ट द्वारा मार्च 2020 में सुनाए गए निर्णय के खिलाफ पीड़िता ने सितंबर 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।