हालांकि इस फैसले से पहले सेंगर की वकील ने उनकी आर्थिक हालत अच्छी ना होने और घर की पारिवारिक जिम्मेदारियों के मद्देनजर सजा में राहत देने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
उल्लेखनीय है कि जुलाई 2019 में पीड़िता की कार पर ट्रक से जानलेवा टक्कर मारने की घटना में पीड़िता की चाची और मौसी की मौत हो गई थी और वकील गंभीर रूप से घायल हो गया था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप कर मामले की सुनवाई को लखनऊ से दिल्ली ट्रांसफर किया था।
सेंगर को वर्ष 2017 में उन्नाव की पीड़िता को नौकरी का झांसा देकर दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया था। इस मामले में एक महिला और एक अन्य पुरुष को भी आरोपी बनाया गया था। इस घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी।