लॉकडाउन के बाद पहली बार दिल्ली हाट में किसी बड़े उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसमें देशभर से हथकरघा और हस्तशिल्पी शामिल हुए हैं। कला और संस्कृति का यह अनूठा संगम लोगों को अपनी ओर खींच रहा है। आईएनए दिल्ली हाट में 4 से 14 नवंबर तक आयोजित 10 दिवसीय दिवाली उत्सव में स्वदेशी वस्तुओं के 200 से अधिक स्टॉल और लगभग 50 फूड स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें हस्त निर्मित सौंदर्य प्रसाधन, मधुबनी व मिथिला की चित्रकारी, पंजाब का फुलकारी परिधान, कुम्हारों और टेराकोटा के हस्त शिल्पकारों द्वारा निर्मित दीये व दीपावली पर्व के दौरान घर को सजाने के तरह-तरह के सामान के अलावा काफी वस्तुएं मिल रही हैं। इनके अलावा क्या है खास, बता रहे हैं संवाददाता आदित्य पाण्डेय -
समय : दोपहर 2.30 बजे
स्थान : आईएनए दिल्ली हाट परिसर
यहां टिकट के लिए लाइन लगी थी। बातचीत में पता चला कि अब यहां प्रवेश का टिकट 10 के बजाय फिर से 30 रुपये का हो गया है। अनलॉक-3 के बाद पिछले हफ्ते तक यह 10 रुपये का था। टिकट लेने के बाद लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग कर और सैनिटाइजेशन के बाद अंदर प्रवेश दिया जा रहा था। प्रवेश करते ही पहला स्टॉल दिल्ली के हैंडीक्राफ्ट स्किन एंड ब्यूटी केयर सॉल्यूशन का नजर आया, जहां नंदनी कुमारी ने बताया कि वह 6 साल से वसंत कुंज में घर पर ही ऑर्गेनिक सौंदर्य प्रसाधन बना रही हैं। उनके पास नारियल तेल से निर्मित कई तरह के साबुन, क्रीम, तेल, हैंडवॉश और फेसवॉश हैं। बकरी के दूध और लेमन ग्रास से निर्मित साबुन, स्क्रब, फेस क्रीम बेहद खास है। तिल और बादाम के तेल में मिश्रित जटामांसी और इंडिगो से निर्मित बालों के लिए तेल भी 250-650 रुपये में उपलब्ध है।
बायीं ओर बिहार के अरुण कुमार पासवान व अन्य 250 से अधिक कलाकारों द्वारा निर्मित मधुबनी चित्रकारी का स्टॉल दिखा, जो एक से बढ़कर एक चित्रों से सजा हुआ था। यहां 250 रुपये से 40 हजार कीमत तक की मधुबनी चित्रकला मिल रही थी। अरुण ने बताया कि वह लगातार 25 साल से यहां स्टॉल लगा रहे हैं, लेकिन कोविड-19 की वजह से इस बार बिक्री कम है। बराबर में पटियाला से आए सतिंदर पाल सिंह के पारंपरिक फुलकारी परिधानों के स्टॉल पर महिलाओं की भीड़ थी।
महिलाएं साड़ी, सलवार, कुर्ती, दुपट्टे के एक से बढ़कर एक रंग व डिजाइन चुन रही थीं। आगे बढ़ने पर कुम्हारों और टेराकोटा के हस्तशिल्पियों के अनेकों स्टॉल दिखे। वहां रंग-बिरंगे दीये, हस्तनिर्मित चित्रकला, कलई से निर्मित बर्तन, रद्दी कागज व मुल्तानी मिट्टी से निर्मित खिलौने, वॉल हैंगिंग, मधुबनी मुखौटे और भी कई खूबसूरत सजावट के सामान बेचे जा रहे थे। दुकान पर मौजूद राधा ने बताया कि वह अपनी मां के साथ इन वस्तुओं को तैयार करती हैं। उनके पास 20 रुपये के कछुए से लेकर एक हजार रुपये में गणपति की मूर्ति उपलब्ध है। अगले स्टॉल पर गुंजन हाथ से बनी लाइटें व सजावट के सामान बेच रहे थे। इनके पास 500 से 800 रुपये तक कीमत का आर्टिफिशियल गुलदस्ता, जूट से निर्मित फूलों की टोकरी बिक रही थी। यहां घूमते लगभग एक घंटा बीत चुका था और धीरे-धीरे भीड़ भी बढ़ रही थी।
आगे कानपुर से आए चमड़े से निर्मित वस्तुओं के स्टाल लगे थे। यहां पर महिलाओं के बैग, बेल्ट, पर्स और भी वस्तुएं उपलब्ध थीं। अजय कुमार शर्मा के स्टॉल पर 200 से 500 रुपये के खुशबूदार दीये बिक रहे थे। इन दीयों में पड़ा खुशबूदार तेल जलकर अपनी खुशबू से घर को तरोताजा रखता है। आगे बढ़ने पर घर में सजावट के लिए झूमर, झालर, आर्टिफिशियल फूलों का गुलदस्ता, महिलाओं की ज्वेलरी, घर के सामने लगाई जाने वाली नेम प्लेट के स्टॉल व आगे करीब 200 मीटर तक भव्य मेला लगा था। शाम के लगभग पौने चार बज चुके थे और इस समय आईएनए दिल्ली हाट के अंदर लगे फूड स्टॉलों पर जमकर भीड़ हो चुकी थी।
स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देना है उद्देश्य
दिल्ली पर्यटन विभाग में प्रबंधन विभाग अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि दिवाली उत्सव का मुख्य उद्देश्य है कि लोग ऑनलाइन खरीदारी से बचें और अधिक से अधिक स्वदेशी सामान खरीदें, ताकि भारतीय हथकरघा और हस्तशिल्प से निर्मित सामानों अधिक से अधिक उपयोग बढ़े।