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चीन की लाइटों से रोशन हुआ भागीरथ पैलेस, त्योहार की बयार में सामाजिक दूरी तार-तार

Sun, 08 Nov 2020 03:42 AM IST
दुष्यंत शर्मा नवनीत शरण, नई दिल्ली
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Chinese Light - फोटो : amar ujala
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पुरानी दिल्ली का भागीरथ प्लेस एक बार फिर रंग-बिरंगी रोशनी में नहा रहा है। हो भी क्यों ना, यही तो जगह है जहां से पूरी दिल्ली दिवाली के दिन तरह-तरह की रोशनी करने वाली लाइटों से सराबोर दिखती है। इन दिनों इस मार्केट में घरों को सजाने वाली लाइट, जगमगाती हुई भगवान श्री लक्ष्मी-गणेश की इलेक्ट्रिॉनिक तस्वीर, स्वस्तिक, कंडील समेत कई तरह के सामान से पटी हुई है। फिलहाल यहां की तंग गलियों में जबरदस्त भीड़ है। पटरी बाजार भी सजने की वजह से अचानक भीड़ बढ़ गई है। यहां से दिल्ली ही नहीं, पूरे उत्तर भारत में सामान ले जाया जाता है।

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छलावा दिख रहा है मेक इन इंडिया
मेक इन इंडिया व स्वदेशी को बढ़ावा देने वाले तो खूब श्लोक दिखें। विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार वाले अभियान भी चले, लेकिन अगर आप दिल्ली के सदर बाजार व भागीरथ बाजार पहुंचे तो मेक इन इंडिया छलावा दिखेगा। यह पूरी मार्केट चीन के सामान से भरी पड़ी है। 99 प्रतिशत पूरे बाजार पर चीन की ही हिस्सेदारी साफ दिखती है। ग्राहकों में भी कुछ ज्यादा स्वदेशी को लेकर जोश नहीं है।

चीन की जगमगाती लड़ियां
यहां चीन के सामान की भरमार है। चाहे वह पाइप लाइटिंग हो या सैंड लेयय झूमर, अलग-अलग तरह की लड़ियां, वॉल लाइट, सीलिंग लाइट, सीओबी लाइन, जो पूरी लाइटिंग को एक जगह फोकस करती है। इन सभी लाइटों की खरीदारी जमकर हो रही है।
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पिछले साल की अपेक्षा 15 प्रतिशत तक महंगी
चीन के साथ भारत के बीच तनातनी जरूर है, लेकिन ड्यूटी कर बढ़ने की वजह से चीनी लाइट भी इस साल महंगी है। पिछले साल की तुलना करें तो 10-15 प्रतिशत महंगी हो गई है। हालांकि, इससे खरीदारी पर कोई खास असर नहीं पड़ा है।

पटरी पर भी पहुंचा चीनी सामान
दुकानों के साथ अब चांदनी चौक, भागीरथ प्लेस में पटरियों पर भी चीन के सामान की बिक्री शुरू हो गई है। सस्ते सजावटी सामान पटरियों पर जमकर खरीदारी हो रही है। इनमें छोटी सजावटी लड़ियां 30-35 रुपये तो इलेक्ट्रिॉनिक लड़ी 40-80 रुपये में मिल रही है। पाइप लाइट 30 से 50 रुपये में बिक रही है। इलेक्ट्रॉनिक जगमग करते भगवान की मूर्ति भी चीन निर्मित ही बिक रही है। इसकी कीमत 100 से 1000 रुपये तक है।

सड़कों पर 75 फीसदी पटरी बाजार
शनिवार से पटरी पर बाजार लगना शुरू हो गया। इस वजह से सामाजिक दूरी के कोई मायने नहीं हैं। क्योंकि, सड़कों का 75 प्रतिशत हिस्सा पटरी से भर गया है। 25 प्रतिशत हिस्से में ही लोग पैदल चलकर खरीदारी कर रहे हैं।

मेक इन इंडिया के लिए सरकार को बढ़ावा देना होगा। चीन का सामान बाजार में पैठ बना चुका है। सस्ता सामान होने की वजह से लोग स्वदेशी से दूरी बनाए हुए हैं। चीन के ब्रांड भी इतने अधिक हैं कि उनकी तुलना में स्वदेशी नहीं ठहर पा रहे हैं। चीनी सामान की तुलना में स्वदेशी महंगे जरूर है, लेकिन टिकाऊ भी है।
-भारत आहूजा, अध्यक्ष-दिल्ली इलेक्ट्रिकल ट्रेडर्स एसोसिएशन

दीपावली को लेकर व्यापार बेहतर है। चीन के सामान की बिक्री ही अधिक है। रंग-बिरंगी लाइटें लोगों को आकर्षित भी कर रही हैं। इस साल चीन का सामान भी महंगा है। टिकाऊ नहीं होने के बावजूद ग्राहक इनकी खरीदारी कर रहे हैं। स्वदेशी को बढ़ावा देने के लिए सरकार को उद्योग व व्यापार को बढ़ावा देना होगा।
-राजू नागपाल, अध्यक्ष-चांदनी चौक स्थित लाजपत राय मार्केट

क्या कहते हैं खरीदार
सजावटी सामान खरीदने पहुंची अनामिका राजलक्ष्मी का कहना था कि दीपावली की सजावट एक या दो दिन की होती है। इसलिए सस्ती सजावटी लड़ियां खरीदना बेहतर है। स्वदेशी लाइटें काफी महंगी भी हैं और वैरायटी भी कम हैं। स्वदेशी को बढ़ाना है तो छोटे उद्योग को बढ़ावा देना होगा। रेवा चेचानी का कहना है कि हर साल स्वदेशी की बात तो होती है। बाजार भी मन बनाकर जाते हैं कि स्वदेश निर्मित सजावटी सामान ही खरीदेंगे, लेकिन बाजार पहुंचते ही पता चलता है कि स्वदेशी की तुलना में चीन के सजावटी सामान ही बेहतर हैं।

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